*नोवा नेचर की टीम ने की उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन जी से की मुलाकात, किंग कोबरा का फ्रेम किया भेट*

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कोरबा – नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी की टीम ने उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन जी से मुलाकात की, इस दौरान मंत्री जी ने नोवा नेचर के कार्यों की सराहना करते हुए उनके प्रयासों को अनुकरणीय बताया,उन्होंने विशेष रूप से किंग कोबरा संरक्षण और सांपों के बचाव कार्यों में उनके योगदान को रेखांकित किया।

मुलाकात के दौरान सांपों के काटने की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चर्चा हुई। IDHP और IHIP पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 2018 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ में 17,000 सांप काटने के मामले दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा न केवल चिंताजनक है बल्कि इस समस्या की गंभीरता को समझने और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। सांप काटने के मामलों में छत्तीसगढ़ भारत में तीसरे स्थान पर है, जो समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी इस समस्या को कम करने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों जैसे रायपुर, दुर्ग, कवर्धा, बीजापुर, और गरियाबंद में 24/7 बचाव टीमों का गठन किया है। ये टीमें मानव और सांप के बीच होने वाले संघर्षों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 2012 से अब तक, नोवा नेचर ने 20,000 से अधिक सांप बचाव अभियान संचालित किए हैं, जिसमें विषैले और विषहीन दोनों प्रकार के सांप शामिल थे।

नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी ने “किंग कोबरा संरक्षण परियोजना” के तहत मंत्री श्री लखन लाल देवांगन जी को किंग कोबरा का एक आकर्षक फ्रेम भेंट स्वरूप दिया। इस भेंट ने मंत्री जी को किंग कोबरा संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उनके संरक्षण में सहयोग देने के लिए प्रेरित किया।

मंत्री श्री लखन लाल देवांगन जी ने नोवा नेचर के इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी संस्थाएं समाज में जागरूकता बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने सांप काटने की घटनाओं को कम करने और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी ने इस दिशा में जागरूकता अभियानों, रेस्क्यू टीमों और सतत प्रयासों के माध्यम से मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन स्थापित करने का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। मंत्री जी ने इस प्रयास में हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।

यह मुलाकात न केवल सांप संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बनी, बल्कि यह एक प्रेरणा भी है कि कैसे सामूहिक प्रयासों से प्रकृति और समाज के बीच सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है।

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