
कोरबा जिला परिवहन कार्यालय में दलालों का प्रभाव और भ्रष्टाचार के आरोप चिंताजनक हैं। बताया जा रहा है कि दलालों को डीटीओ के चेंबर में सीधे प्रवेश की अनुमति है, जबकि अन्य लोगों के लिए अलग-अलग नियम लागू किए जाते हैं। इसके चलते, ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारियों के साथ दलालों की मिलीभगत हो सकती है और कई काम केवल पैसों के लेन-देन के बाद ही होते हैं।


*फुरसत की नोकरी
यहां की व्यवस्था की सारी जानकारी यहां कार्य करने वाले सभी कर्मचारियों को मालूम है,इसलिए तो वह आराम से अपना मनोरंजन कर रहे हैं।
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हमें निगम के नोटिस की चिंता नहीं साहब ! हमारा तो सब काम सेटिंग पर चलता है….

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने का दावा किया गया है, लेकिन इस तरह की घटनाएँ उस नीति के विपरीत प्रतीत होती हैं। यदि यह आरोप सत्य हैं, तो यह सरकार के दावों की सच्चाई पर सवाल खड़ा करता है। ऐसे मामलों में कार्रवाई की जरूरत है ताकि परिवहन कार्यालय में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित हो सके।

