भ्रष्टाचार का बांध: पहली बारिश सह नहीं सका अमृत सरोवर अभियान से बना बांध, बंड में आई दरार, बह गया नहर, वन श्रमिक कल्याण समिति ने की जांच की मांग

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कोरबा। भारत सरकार के अमृत सरोवर अभियान के तहत सोलवां में 65 लाख की लागत से डेम का निर्माण कराया गया। यह डेम पहली ही बारिश की मार नही सह सका। जहां डेम के बंड से बह कर मिट्टी नाले में समाहित हो गए, वही कई स्थान पर दरारें आ गई। पानी निकासी के लिए बनाया गया नहर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मामले में भ्रष्टाचार का बू आने पर वन श्रमिक कल्याण समिति ने प्रशासन की तकनीकी टीम से जांच कराने की मांग की है।मामले में कलेक्टर ने जांच के लिए जिला पंचायत सीईओ को निर्देश जारी किया है।

वन श्रमिक कल्याण समिति के अध्यक्ष पीएस श्रीवास ने कलेक्टर को लिखे पत्र में उल्लेख किया है कि कोरबा वन मंडल के पसरखेत वन परिक्षेत्र के बासीन सर्किल अंतर्गत ग्राम सोलवां में केम्पा मद से अर्दन डेम का निर्माण कराया गया है। राज्य केम्पा नरवा विकास योजना से निर्मित डेम की लंबाई 100 मीटर कैंचमेंट एरिया 1480 हेक्टेयर में है। इस डेम का निर्माण फरवरी 2023 में शुरू किया गया और महज चार माह के भीतर 19 जून 2023 में पूर्ण कर लिया गया। डेम के निर्माण में बरती गई लापरवाही व गुणवत्ता की पोल उस समय खुल गई, जब महज एक माह के भीतर पहली बारिश को ही डेम बर्दाश्त नहीं कर सका। जल भराव के कारण डेम के बंड से बह कर मिट्टी नाले में समाहित हो गए। बंड में जगह-जगह दरारें आ गई। उसे बचाने तिरपाल का सहारा लेना पड़ा। दूसरी। ओर पानी के तेज बहाव से बाजू में निर्मित नहर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। समिति अध्यक्ष का कहना है कि निर्माण के लिए जो प्राक्कलन तैयार किया गया, उसके अनुरूप डेम का निर्माण नहीं किया गया होगा, जिससे यह स्थिति निर्मित हुई होगी। ऐसा कर भारत सरकार के अमृत सरोवर योजना में भारी बंदरबांट की बू आ रही है। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच वन मंडल कार्यालय से प्राकलन हासिल कर शिकायतकर्ता के समक्ष अपनी तकनीकी टीम ग्रामीण यांत्रिकी विभाग या लोक निर्माण विभाग से कराने की मांग की है। बताया जा रहा है कि समिति की शिकायत को कलेक्टर ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने मामले में अग्रिम कारवाई के लिए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को निर्देश जारी किया है।

लागत को सार्वजनिक करने से बच रहे अफसर

वन विभाग द्वारा मौके पर डेम निर्माण के बाद सूचना पटल तैयार किया गया है। नियमानुसार सूचना पटल का निर्माण कार्य शुरू होने से पहले किया जाना था । खास बात तो यह है कि सूचना पटल में तमाम जानकारी का उल्लेख है, लेकिन लागत राशि का कहीं जिक्र नहीं है। इसे लेकर कोई 65 लाख तो कोई 80 लाख बता रहा है। लागत राशि का उल्लेख नहीं करने के पीछे मंशा जांच से ही उजागर होगा।

मजदूरी भुगतान का कराएंगे सत्यापन

समिति अध्यक्ष श्री श्रीवास का कहना है कि डेम निर्माण के दौरान काम में लगे मजदूरों की मजदूरी राशि को लेकर भी अलग-अलग बातें सामने आ रही है। पता चला है कि मजदूरों को नगद 200 रुपए प्रतिदिन की दर से मजदूरी का भुगतान किया गया है, जबकि मजदूरी राशि अधिक है। जिसका भुगतान सीधे मजदूरों को खाते में किया जाना है। इस संबंध में भी सत्यापन की मांग की जाएगी।

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