कोरबा : मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डेंगू मरीज की उपचार में दौरान मौत के बाद परिजनों ने हंगामा कर दिया था। मौत के बाद उपचार कर रहे चिकित्सक डॉ वेदप्रकाश जो कि मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर है और एमडी मेडिसिन है उन्होंने परिजनों को अमर्यादित बयान देते कहा था कि डेंगू के मरीज की मौत ही होती है। इधर इस मामले के सामने आने के बाद पता लगा है कि डॉक्टर वेदप्रकाश शहर के एक निजी नर्सिंग होम श्वेता नर्सिंग होम में अपनी सेवाएं देते है इसी अस्पताल में मेडिकल कॉलेज के ही डॉक्टर शशिकांत भास्कर भी अपनी सेवाएं देते है वो भी ड्यूटी समय में ! जबकि स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव चंदन कुमार ने कल ही एक परिपत्र जारी करते 2011 के नियमों को मेडिकल कॉलेज के डीन को भेजा है कि सरकारी चिकित्सक को अपने घर में प्रैक्टिस की अनुमति होगी वो किसी निजी क्लिनिक या नर्सिंग होम में प्रैक्टिस किसी भी स्तर पर नहीं करेंगे। बावजूद इसके एमडी मेडिसिन डॉक्टर विशाल राजपूत अपनी निजी क्लिनिक खोले हुए है वहीं ऐसे ही करीब 5 चिकित्सक सरकार से मोटी तनख्वाह जरूर लेते है लेकिन काम निजी करते है इससे मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपचार कराने पहुंचने वाले मरीजों को समय पर चिकित्सक नहीं मिलते है और कई बार बेहतर उपचार के अभाव में उनकी मौत हो जाती है। इस मामले में शासकीय मेडिकल कॉलेज कोरबा के अधिष्ठाता डॉक्टर अविनाश मेश्राम को कार्रवाई हेतु लिखित शिकायत का इंतजार है वो कहते है जब तक लिखित शिकायत नहीं मिलेगी वो किसी तरह की कार्रवाई नहीं करेंगे। जबकि अस्पताल का निरीक्षण कर खुद वो देख सकते है कि उनके चिकित्सक अस्पताल में उपस्थित है या नहीं है। हद तो ये है कि निजी प्रैक्टिस करने वाले अधिकांश चिकित्सक एनपीए याने नॉन प्रैक्टिस अलाउंस तक सरकार से लेते है जो कि सरकार के साथ धोखा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि,डॉक्टर पाणिग्रही खुद का आयुष्मान अस्पताल चला रहे वहीं एमडी मेडिसिन डॉक्टर प्रितेश मसीह कृष्णा हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं देते है। 
