उधर डेढ़ लाख के फोन पर बवाल, इधर 65 लाख बहाने की तैयारी
कोरबा/प्रदेश में कांकेर के परलकोर्ट जलाशय से मोबाइल ढूंढने लाखों लीटर पानी बहाने को लेकर बवाल मचा हुआ है।इधर कोरबा में 65 लाख रुपए को पानी में बहाने की नीव जलाशय निर्माण के साथ रख दी गई है, निर्माण को पूरे हुए महज डेढ़ माह हु हुए हैं, लेकिन बंड में जगह-जगह दरारें आनी शुरू हो गई है कई स्थान पर पत्थर मिट्टी में पूरी तरह धस गए हैं,ग्रामीणों ने जलाशय की गुणवत्ता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है, आशंका जताई जा रही है कि पहली ही बारिश में जलाशय नेस्तनाबूद हो जाएगा। ऐसे में विभाग की भर्राशाही सरकार की मंशा पर पानी फिर सकता है।
जी हां! हम बात कर रहे हैं कोरबा वन मंडल के पसरखेत वन परीक्षेत्र अंतर्गत बासिन सर्किल के ग्राम सोलवां का।
या गांव बीहड़ क्षेत्र में बसा हुआ है गांव के चारों ओर घने जंगल स्थित है। इसके अलावा छोटी-छोटी नदी नाले प्रवाहित हैं जिसके पानी गांव के समीप स्थित फुलसरिया मुड़ा में गिरता है। ग्रामीण फुलसरिया मुड़ा में बंधान तैयार कर खेतों की प्यास बुझाते आ रहे थे। शासन की मंशा अनुरूप क्षेत्रवासियों को राहत पहुंचाने विभागीय अफसरों ने नरवा विकास योजना के तहत जलाशय निर्माण की योजना तैयार की। इस योजना को मुख्यालय से वर्ष 2021-22 में मंजूरी दे दी गई। नरवा विकास योजना के तहत कैंप आमद से 65 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई इस राशि से फुलसरिया मुड़ा में जलाशय का निर्माण किया जाना था। मुख्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद जलाशय निर्माण का काम तो शुरू किया गया लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों ने भर्राशाही शुरू कर दी। नियमानुसार वन परिक्षेत्र अधिकारी के मार्गदर्शन में मातहत अधिकारी कर्मचारियों को जलाशय का निर्माण करना था। लेकिन निर्माण कार्य की जवाबदारी एक ठेकेदार को सौंप दी गई। सूत्रों की मानें तो जिस स्थान पर पहले बंधन तैयार किया जाता था उस स्थान पर ही ठेकेदार ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया। मिट्टी के कई परत डालकर जला सके लिए विशाल बंड तैयार किया गया। इस दौरान पानी का छिड़काव किया जाना था प्रत्येक परत की मिट्टी को उपकरण की मदद से दबाना था। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं किया गया। जलाशय का बंड तैयार होने के बाद पानी छिड़काव कर उपकरण से दबाव की औपचारिकता पूरी की गई। इसके साथ ही बंड के एक हिस्से में बिछा दिया गया। इससे भी भारी लापरवाही बरती गई। लिहाजा निर्माण कार्य पूरे होने के डेढ़ माह बाद ही जलाशय के बंड में दरारे आनी शुरू हो गई। जलाशय के बंड में बिछाए गए पत्थर कई स्थान से पूरी तरह मिट्टी में धस गए है। खास बात तो यह है कि निर्माण कार्य को डेढ़ माह का समय बीत चुका है लेकिन सूचना पटल गायब है, जिससे ग्रामीणों को निर्माण कार्य में होने वाले खर्च की जानकारी मिल सके। क्षेत्र के ग्रामीणों ने भी जलाशय की गुणवत्ता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है उनका कहना है कि फुलसरिया मुड़ा बारहमासी नाला है,जिसमें जंगल के पानी प्रभावित होते हैं बारिश के दिनों में जलभराव और प्रवाह तेज होती है,जिससे पहली बारिश में जला से ध्वस्त हो सकता है।
*200 रुपये नगदी मंजूरी देता था बिट्टू*
फुलसरिया मुड़ा में जलाशय निर्माण के दौरान मजदूरी भुगतान में भी भारी भर्राशाही ह बरति गई,वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों ने मजदूरों के लिए नगद भुगतान की राशि तय कर दी ,उन्हें खाते में 323 रुपए के बजाय प्रति सप्ताह 200 रुपए दिए जाने की बात कही गई। जिसका भुगतान ठेकेदार का बिट्टू नामक कर्मचारी करता था मजदूरी को लेकर विवाद की स्थिति भी निर्मित हुई थी।

*पहले से निर्मित नाली को दिया नहर का रूप*
ग्रामीणों की माने तो रामपुर विधायक ननकीराम कंवर की पहल पर फुलसरिया मुड़ा में बंधान तैयार किया गया था, बधान से पानी निकासी के लिए मिट्टी की खुदाई कर नाली बनाया गया था, इस नाली को ही मिट्टी कटिंग और पत्थर बिछाकर नहर का रूप दे दिया गया।जिससे किसानों को पानी मिलना संभव नहीं है।

*भर्राशाही छिपाने डलवाई रेत*
सीएम भूपेश बघेल भेंट मुलाकात कार्यक्रम में ग्राम चिर्रा पहुंचे थे,इसके ठीक एक दिन पहले जलाशय में भर्राशाही छुपाने की कवायद चलती रही, रविवार की सुबह से ही गिनती के मजदूरों को काम पर लगाया गया था,जो जलाशय के बंड में दबे पत्थर के चारों ओर रेट डालने का काम कर रहे थे।

*जवाब देने से बच रहे अधिकारी*
सोलवा के फुलसरिया मुड़ा में जलाशय निर्माण को लेकर सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी केशव सिदार से बातचीत की गई उन्होंने रेंजर से जानकारी लेने की बात कह दी, इधर रेंजर तोषी वर्मा ने जलाशय निर्माण का कार्य पूर्ण होने की जानकारी तो दे दी, लेकिन अन्य सवालों को व्यस्तता का हवाला देते हुए टाल दिया।

