
कोरबा। पाली वन परिक्षेत्र के लाफा के जंगलों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब ग्रामीणों ने एक शिकारी फंदे में फंसे विशालकाय तेंदुए को दहाड़ते और छटपटाते देखा। सूअर के लिए बिछाया गया मौत का जाल एक बेगुनाह तेंदुए के लिए काल बन गया था। गनीमत रही कि वक्त रहते वन विभाग की टीम पहुंच गई, वरना कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
🔴 आधी रात का ऑपरेशन: ट्रेंकुलाइज कर किया गया काबू
तेंदुआ फंदे में बुरी तरह जकड़ा हुआ था और बेहद आक्रामक था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रायपुर से तत्काल ट्रेंकुलाइजेशन की अनुमति ली गई। रात 10 बजे कानन पेंडारी (बिलासपुर) से डॉ. चंदन और एक्सपर्ट रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची।
चुनौती: अंधेरे जंगल में घायल तेंदुए को बेहोश करना बेहद जोखिम भरा था।
कार्रवाई: सटीक निशाना साधकर तेंदुए को ट्रेंकुलाइज गन से बेहोश किया गया।
सफलता: 3 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तेंदुए को लोहे के तारों से मुक्त कराकर रेस्क्यू वाहन से अस्पताल भेजा गया।
🚨 शिकारी की ‘मांस’ वाली लालसा ले गई जेल
तेंदुए के शिकार की कोशिश ने वन विभाग को अलर्ट कर दिया। अचानकमार टाइगर रिजर्व से बुलाई गई डॉग स्क्वाड की टीम ने शिकारी के कदमों के निशान पीछा किया और सीधे विजय कुमार गोड़ के दरवाजे पर जा रुकी।
“आरोपित ने कबूल किया कि उसने सूअर का मांस खाने के लिए फंदा लगाया था, लेकिन उसमें तेंदुआ फंस गया।”
वन विभाग ने आरोपी के पास से शिकार में प्रयुक्त तार और अन्य सामग्री जब्त कर ली है। उसे वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर कटघोरा जेल भेज दिया गया है।
🌿 इलाज के बाद फिर मिली ‘आजादी’
तेंदुए के पेट और पिछले हिस्से में चोटें आई थीं। कानन पेंडारी में इलाज और 24 घंटे की गहन निगरानी के बाद, बुधवार शाम 6 बजे उसे वापस उसी के प्राकृतिक आवास (जंगल) में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
सावधान! जंगली जानवरों का शिकार करना न केवल क्रूरता है, बल्कि गैर-जमानती अपराध भी है। सतर्क रहें और वन्यजीवों की रक्षा करें।
