कोरबा। पेट की मजबूरी और हालात की मार एक 16 वर्षीय नाबालिग रमाकांत को उस दर्दनाक हादसे तक ले आई, जिसने उसकी जिंदगी पर गहरा घाव छोड़ दिया। मानिकपुर चौकी क्षेत्र के मुड़पार बाजार में गन्ना जूस की दुकान में काम कर रहे इस किशोर का हाथ अचानक मशीन में फंस गया, जिससे उसकी बांए हाथ की चार उंगलियां टूट गईं और पूरा पंजा बुरी तरह घायल हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रमाकांत दुकान पर गन्ने के छिलके को मशीन में डाल रहा था, तभी अचानक उसका हाथ मशीन के रोलर में फंस गया। कुछ ही सेकंड में दर्द से चीखते हुए वह जमीन पर गिर पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल मशीन बंद कर किसी तरह उसका हाथ बाहर निकाला, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था।
घटना के बाद घायल नाबालिग को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार उसकी चार उंगलियों में फ्रैक्चर है और पंजे में भी गंभीर चोट आई है, जिससे लंबे समय तक इलाज और देखभाल की जरूरत पड़ेगी।
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर एक नाबालिग से इस तरह का खतरनाक काम क्यों कराया जा रहा था? क्या दुकान संचालक को बाल श्रम कानूनों का कोई डर नहीं है? क्या प्रशासन की नजरें इस तरह के मामलों पर नहीं पड़तीं?
गौरतलब है कि बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत नाबालिगों से खतरनाक मशीनों पर काम कराना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में गन्ना जूस मशीनों में खुलेआम नाबालिगों से मजदूरी कराई जा रही है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और कानून के खुले उल्लंघन का जीता-जागता उदाहरण है। सवाल यह भी है कि क्या इस घटना के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
फिलहाल, घायल रमाकांत अस्पताल में दर्द से कराह रहा है, और उसके परिवार पर चिंता का पहाड़ टूट पड़ा है।
