नशे में सरकारी गाड़ी… सड़कों पर मौत का खेल ! कोरबा में कथित आबकारी विभाग का ड्राइवर गिरफ्तार

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कोरबा | कोतवाली थाना क्षेत्र

कोरबा में एक बार फिर सरकारी सिस्टम की बड़ी लापरवाही सामने आई है—इस बार मामला सीधे आबकारी विभाग से जुड़ा है। जिस विभाग की जिम्मेदारी नशे पर नियंत्रण की है, उसी विभाग की गाड़ी का कथित ड्राइवर(गौर कीजियेगा ज्यादा पड़े लिखी नही समघ पाते) नशे में धुत होकर सड़कों पर रैश ड्राइविंग करता पकड़ा गया।

मानिकपुर थाना क्षेत्र में पुलिस की नियमित चेकिंग के दौरान तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चला रहे ड्राइवर को रोका गया। जांच में सामने आया कि चालक आकाश यादव शराब के नशे में था।

पूछताछ में बदतमीजी, मौके पर बढ़ा तनाव

पुलिस द्वारा जब उससे पूछताछ की गई, तो उसने खुद को आबकारी विभाग का ड्राइवर बताते सहयोग करने के बजाय बदतमीजी शुरू कर दी। मौके पर हालात कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गए, जिसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए उसे तत्काल हिरासत में ले लिया।

कोरबा आबकारी विभाग ने झाड़ा पल्ला

हालाकिं ख़बर सार्वजनिक होने के बाद जिला आबकारी अधिकारी ने गाड़ी और ड्राइवर के कोरबा आबकारी विभाग में नियोजित होने से इनकार किया है। उनके मुताबिक ऐसा कोई वाहन या इस नाम का चालक कोरबा में पदस्थ नहीं है। हालांकि यह सच है कि जिस स्कार्पियो गाड़ी सीजी13यूई0373 में बकायदा पीछे छत्तीसगढ़ शासन लिखा हुआ है। मतलब या तो यह गाड़ी सरकारी विभाग में नियोजित है या फिर चालक फर्जी तरीके से रुआब के लिए लिखवाकर रखा है। आबकारी विभाग अगर मना कर रहा है तो फिर ये कहाँ पदस्थ है इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

 

मेडिकल के बाद सीधा जेल

पुलिस ने आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराया, जिसमें नशे की पुष्टि हुई। इसके बाद उसके खिलाफ नशे में वाहन चलाने और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने के मामलों में कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधात्मक धाराओं में जेल भेज दिया गया।

सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी बोले कर रहा था बदतमीजी

कोतवाली थाना क्षेत्र के मानिकपुर पुलिस सहायता केंद्र के सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि आरोपी को चेकिंग के दौरान रोका गया था, जहां वह नशे की हालत में वाहन चलाते पाया गया। पूछताछ के दौरान उसके द्वारा असहयोग और अभद्र व्यवहार किया गया, जिसके बाद विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

सबसे बड़ा सवाल – जब “नियंत्रण करने वाले” ही नियम तोड़ें तो ?

यह घटना एक गंभीर सवाल खड़ा करती है—कोरबा जिले की नही हम बात कर रहे पूरे प्रदेश की जिस आबकारी विभाग की जिम्मेदारी नशे पर नियंत्रण की है, अगर उसी के कर्मचारी नशे में सड़कों पर दौड़ेंगे, तो आम जनता को क्या संदेश जाएगा ?

कोरबा जिले की आयुक्त आभकारी तो बिना जांच किये एक फ़ाइल भी साइन नही करती तो सराबी ड्राइव तो आप समघ ही सकते है कि नही..

साफ है- सरकार  में अब नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई तय है, चाहे वह किसी जिले का हो या किसी भी विभाग से जुड़ा क्यों न हो।

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