
कोरबा, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना गैर राजनैतिक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप मिरी ने तिलक भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि छत्तीसगढ़िया मन के उपेक्षा राज्य स्थापना काल से पहले हो रहा था जिसको देखते हुए छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना का 6 से 7 युवाओं का समूह आज प्रदेश किसी नाम की मुहताज नहीं है।
दिलीप मिरी ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष की कमान तत्कालीन सरकार के भाजपा किसान मोर्चा के महामंत्री अमित बघेल को दिया गया, जिन्हें भाजपा ने अनुशासनहीनता मामले में निष्काषित कर दिया था । संगठन में कार्यरत सेनानियों ने अमित बघेल के नेतृत्व में सवाल खड़ा करना चालू कर दिया। अमित बघेल की राजनीतिक महत्वकांक्षा स्पष्ट दिखने लगी, यह विश्वास में तब बदल गया जब 2023-24 के विधानसभा चुनाव में अमित बघेल ने चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी, वो भी चुनाव तिथि के ठीक 21 दिन पहले जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का पदार्पण हुआ । संगठन के प्रदेश कमेटी के बिना सहमती के अमित बघेल ने निर्णय लिया और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी को चुनावी मैदान में उतार दिया, जिसमें सभी प्रत्याशियों की जमानत जप्त हो गई, जो छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के विचारधारा के बिल्कुल विपरीत था । सेनानियों को यह बताया गया कि जनता चाह रही है कि संगठन चुनाव लड़े, तो संगठन के निर्णय अनुसार पार्टी का गठन किया गया ऐसा कथन अमित बघेल का था,संगठन को दो टुकड़ों में बाँट दिए एक छतीसगढ़िया क्रान्ति सेना दूसरा जोहार अब सवाल संगठन में चुनाव लड़ने का निर्णय किसका था? संगठन छतीसगढ़ पार्टी, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के बारे में विस्तृत जानकारी निकल कर आई वो चौकाने वाली थी । संस्थापक सदस्य के नाम एक ही परिवार के लोग शामिल है। सेनानियों के यह भी मत रहा कि पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर अमित बघेल पार्टी चलाए, छतीसगढ़िया क्रान्ति सेना चूंकि एक गैर राजनीतिक संगठन है, संगठन के संस्थापक गण के निर्णय अनुसार छतीसगढ़िया क्रान्ति सेना विशुद्ध रूप से गैर राजनीतिक संगठन अंदाज मे संगठन का कार्य करेगी। जिसके तहत 24 अगस्त को दुर्ग भिलाई में बैठक आयोजित कर संस्थापक सदस्यों द्वारा उक्त सभी बातों को ध्यान में रखते हुए संस्थापक सदस्यों के निर्णयानुसार सेनानियों की सहमती से संगठन की जिम्मेदारी बतौर प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सौपा गया है। पत्रवार्ता में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे ।
