*उधारकर्ता को सर्टिफिकेट दिया, पैनल एडवोकेट के खिलाफ की गई कार्यवाही निरस्त*

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कोरबा। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश अमिटेन्द्र प्रसाद ने एक मामले में पैनल एडवोकेट रामकिंकर सिंह के खिलाफ लोअर कोर्ट की कार्यवाही को निरस्त कर दिया है।

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याचिकाकर्ता द्वारा कहा गया कि वे जिला एवं सत्र न्यायालय, बेमेतरा में पिछले 38 वर्षों से अधिक समय से वकालत करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। उन्हें केवल इस आधार पर झूठा फंसाया गया है कि भारतीय स्टेट बैंक, शाखा छिरहा, जिला बेमेतरा के पैनल अधिवक्ता होने के नाते, उन्होंने अपेक्षित गैर-भार प्रमाण पत्र जारी किया और उधारकर्ता की भूमि के बारे में प्रमाणित किया कि उनके पास संपत्ति पर स्पष्ट, बिक्री योग्य स्वामित्व है, जो सभी भारों से मुक्त है, जिसके लिए उधारकर्ता ने ऋण के लिए आवेदन किया था और तदनुसार उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड की योजना के तहत ऋण दिया गया था। बाद में एक शिकायत पर उनके विरुद्ध आपराधिक मामला बना दिया गया। बेमेतरा में इस पर सुनवाई हुई।

जिस पर विद्वान ट्रायल कोर्ट द्वारा याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश और साथ ही दिनांक 20.01.2021 के आदेश के तहत पुनरीक्षण याचिका को खारिज करने के आदेश को याचिकाकर्ता के संबंध में विशेष रूप से के. नारायण राव (सुप्रा) में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में रद्द किया जाना चाहिए। परिणामस्वरूप, विद्वान अपर सत्र न्यायाधीश, बेमेतरा, जिला बेमेतरा द्वारा दंड पुनरीक्षण क्रमांक 04/2020 में पारित आदेश दिनांक 20.01.2021, साथ ही न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, बेमेतरा द्वारा दंड प्रकरण क्रमांक 284/2019 में पारित आदेश दिनांक 07.12.2019, तथा अब तक केवल याचिकाकर्ता से संबंधित समस्त परिणामी कार्यवाहियां निरस्त की जाती हैं। परिणामस्वरूप, यह याचिका स्वीकृत की जाती है। लागत के संबंध में कोई आदेश नहीं। कहा गया कि केवल इसलिए कि किसी अधिवक्ता द्वारा दी गई राय से किसी व्यक्ति/संस्था को वित्तीय नुकसान हुआ है, यह उसके खिलाफ मुकदमा चलाने का आधार नहीं हो सकता। इस बात के कुछ सबूत होने चाहिए कि उक्त कृत्य केवल व्यक्ति/संस्था को धोखा देने के इरादे से किया गया था और इसमें अन्य षड्यंत्रकारियों की सक्रिय भागीदारी थी।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में इसे प्रकरण को लेकर अधिवक्ता अंशुल तिवारी की ओर से पैरवी की गई।

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