कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लापरवाही की हद — मरीजों की जान खतरे में, प्रबंधन मौन ! फीमेल वार्ड में ब्लड रिएक्शन मरीज को वक्त पर नर्स न मिली, डॉक्टर ने बचाई जान — महीनों से गैरहाजिरी और मनमानी ड्यूटी का रिकॉर्ड…

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कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लापरवाही की हद — मरीजों की जान खतरे में, प्रबंधन मौन!

फीमेल वार्ड में ब्लड रिएक्शन मरीज को वक्त पर नर्स न मिली, डॉक्टर ने बचाई जान — महीनों से गैरहाजिरी और मनमानी ड्यूटी का रिकॉर्ड

कोरबा। स्व. बिसाहू दास महंत स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में मरीजों की जिंदगी हर रोज खतरे में है। वजह है यहां स्टाफ नर्सों का बेलगाम और गैरजिम्मेदार रवैया। ताजा मामला फीमेल वार्ड में सामने आया, जहां ड्यूटी पर तैनात नर्स बिना चार्ज दिए चली गई और दूसरी नर्स आधे घंटे तक अस्पताल नहीं पहुंची। इस बीच ब्लड ट्रांसफ्यूजन मरीज को रिएक्शन हो गया। गनीमत रही कि डॉक्टर वक्त पर पहुंच गए, वरना बड़ा हादसा तय था।

डॉ. विशाल राजपूत ने अस्पताल के ऑफिशियल ग्रुप में लिखा — “फीमेल वार्ड में कोई सिस्टर नहीं है। बिना ओवर दिए, दोपहर वाली सिस्टर चली गई है। बीटी वाले मरीज को ब्लड रिएक्शन हो गया है। अगर मरीज को कुछ हुआ, तो सिस्टर जिम्मेदार होगी।”

बायोमेट्रिक रिकॉर्ड ने खोली सच्चाई

शिकायत के बाद जब प्रबंधन ने बायोमेट्रिक हाज़िरी रिकॉर्ड खंगाला तो सच्चाई सामने आ गई। ड्यूटी पर तैनात संविदा स्टाफ नर्स का महीनों से यही रवैया था। कभी 12 मिनट, कभी 17 मिनट, तो कभी महज 1 घंटे में ही अस्पताल छोड़ देती थी। कई बार बिना अनुमति के छुट्टियां भी लीं। रिकॉर्ड में साफ है कि वह लगभग 20 दिन देर से ड्यूटी आ रही थी।

नोटिस के बाद भी न सुधरी

नोटिस देने के बाद भी नर्स का रवैया नहीं बदला। उल्टे पहले दो दिन बगैर अनुमति के छुट्टी ली, फिर ड्यूटी ज्वाइन कर सिर्फ 17 मिनट में लौट गई। इसके बाद भी आए दिन आधे घंटे, एक घंटा लेट आना और चार्ज दिए बगैर लौटना जारी है।

डीन का जवाब — चेतावनी दी गई

मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. के.के. सहारे का कहना है कि
“अनुशासन समिति बनाई गई है। स्टाफ की मॉनिटरिंग की जा रही है। देरी करने वालों को अंतिम चेतावनी दी गई है। घटना की पुनरावृत्ति पर बर्खास्तगी की कार्रवाई होगी।”

प्रशासनिक ढिलाई या मिलीभगत ?

प्रशासन की लापरवाही यहीं खत्म नहीं होती। बायोमेट्रिक रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं कि ड्यूटी से गायब रहने वालों को पूरी सैलरी दी जा रही है।  यहाँ कि मेट्रन ने ऐसा सिस्टम सेट किया है कि नर्सों से 6-6 घंटे की दो शिफ्ट तो 12 घंटे की नाइट शिफ्ट चलाई जा रही है जबकि सबको 8 घंटे की बराबर शिफ्ट मे काम लिया जा सकता है, इससे श्रम कानून का उलँघन भी रुकेगा। अस्पताल मे वैसे भी नर्स की कमी है बावजूद चहेतों को नियमित अवकाश दिया जाता है। जबकि एमएस को व्यवस्था बेहतर करनी चाहिए। इसको आप क्या कहेंगे ?

एक मरीज तो बच गया, अगली बार कौन होगा जिम्मेदार?

गनीमत रही कि डॉक्टर समय पर पहुंच गए और मरीज की जान बच गई। मगर क्या हर बार किस्मत यूं ही साथ देगी? मरीज की जान से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई कब होगी? या फिर प्रबंधन किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?

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