
नई दिल्ली/रायपुर: बहुचर्चित भारतमाला घोटाला मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने नायकबंदा, तहसील अभनपुर में पदस्थ पटवारी दिनेश पटेल को अग्रिम जमानत दे दी है। यह मामला भारतमाला परियोजना के तहत बन रही रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर सड़क के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए कथित मुआवजे घोटाले से जुड़ा है।

पटवारी दिनेश पटेल की ओर से अधिवक्ता प्रियमवदा सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। अधिवक्ता सिंह ने मामले की जांच और अन्वेषण के अधीन होने के कारण तथ्यों पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिनेश पटेल को अग्रिम जमानत की राहत प्रदान की है।
दिनेश पटेल की न्यायिक यात्रा: हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक
यह मामला तब प्रकाश में आया जब दिनेश पटेल को इकोनॉमिक ऑफेंस इन्वेस्टिगेशन एंड एंटी करप्शन ब्यूरो, रायपुर (छत्तीसगढ़) से 25 अप्रैल, 2025 को हाजिरी का समन मिला। इसके जवाब में, उन्होंने 30 अप्रैल, 2025 को सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका प्रस्तुत की, जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया।
सत्र न्यायालय के आदेश से व्यथित होकर, दिनेश पटेल ने 5 मई, 2025 को माननीय छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के समक्ष अग्रिम जमानत याचिका दायर की। हालांकि, माननीय मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की पीठ ने 8 मई, 2025 को इस याचिका को भी खारिज कर दिया।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध, दिनेश पटेल ने अपनी अंतिम उम्मीद के रूप में माननीय सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अधिवक्ता प्रियमवदा सिंह के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई, जिस पर माननीय न्यायमूर्ति संदीप मेहता और माननीय न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बगची की पीठ ने सुनवाई की। पीठ ने मामले के सभी पहलुओं पर विचार करने और प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर 23 जून, 2025 के आदेश के माध्यम से अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए अंतरिम राहत प्रदान की।
यह फैसला भारतमाला मुआवजा घोटाले में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, और आगे की जांच के नतीजे पर सभी की निगाहें होंगी।
