
कुसमुंडा, कोरबा। कुसमुंडा क्षेत्र में एसईसीएल (SECL) की आउटसोर्सिंग कंपनी नीलकंठ के खिलाफ स्थानीय उपेक्षा और कर्मचारियों के दुर्व्यवहार को लेकर छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना सहित कई गैर-राजनीतिक संगठनों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इन संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आज महतारी अंगना में संपन्न हुई, जिसमें कंपनी की नीतियों का जोरदार विरोध किया गया और जल्द ही बड़े आंदोलन की घोषणा की गई।
बाहरी भर्ती और स्थानीय उपेक्षा पर आपत्ति
बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों और संगठन प्रमुखों ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि आउटसोर्सिंग कंपनी नीलकंठ द्वारा स्थानीय निवासियों की उपेक्षा की जा रही है और बाहरी व्यक्तियों की भर्ती को प्राथमिकता दी जा रही है। संगठनों का कहना है कि जिस क्षेत्र से कोयला निकाला जा रहा है, वहां के भूविस्थापितों और स्थानीय योग्य युवाओं को रोजगार में पहला हक मिलना चाहिए, लेकिन कंपनी ऐसा नहीं कर रही है।

बाउंसरों द्वारा मारपीट पर भारी विरोध
बैठक का एक प्रमुख मुद्दा कंपनी द्वारा हाल ही में किसानों/भूविस्थापितों से लड़ने और उन्हें पीटने के लिए महिला बाउंसरों की तैनाती था। सदस्यों ने इसे अमानवीय और तानाशाही कदम बताते हुए इसका भारी विरोध किया। संगठन प्रमुखों ने कहा कि अपनी मांगों के लिए आंदोलन करने वाले स्थानीय लोगों पर बल प्रयोग करना और बाउंसरों से मारपीट कराना बिल्कुल अस्वीकार्य है। यह घटना कंपनी की स्थानीय विरोधी मानसिकता को दर्शाती है।

उपस्थित सभी संगठन प्रमुखों और सदस्यों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि कंपनी की इन जनविरोधी नीतियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि जल्द ही नीलकंठ कंपनी और संबंधित एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ एक बड़ा और व्यापक आंदोलन किया जाएगा। इस आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने और अन्य संगठनों को जोड़ने पर विचार-विमर्श किया गया है।
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना, छत्तीसगढ़ (गैर राजनीतिक संगठन) की इस बैठक में प्रमुख रूप से विनोद सारथी, कैलाश साहू, गोविंदा सारथी और अन्य कई संगठन के प्रमुख और पदाधिकारीगण उपस्थित रहे। सभी ने संकल्प लिया कि स्थानीय लोगों के हकों की लड़ाई मजबूती से लड़ी जाएगी।
संगठनों के इस ऐलान के बाद, कुसमुंडा क्षेत्र में तनाव बढ़ने और बड़े प्रदर्शन की संभावना है, जिस पर प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
