*कोरबा में स्कूल स्टेट चैंपियनशीप ट्रॉफी के लिए खूनी संघर्ष, मेजबान टीम के हाॅकी खिलाड़ियों ने स्टीक से मारकर सिर फाड़ दिया, जिला खेल अधिकारी ने जानकारी नही कहकर झाड़ा पल्ला ….!*

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कोरबा । छत्तीसगढ़ में जवाबदार अधिकारी कितने लापरवाह है, इसकी बानगी कोरबा जिला में एक बार फिर सामने आयी है। यहां 25वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के समापन में चैंपियनशीप ट्रॉफी को रखने के लिए हाॅकी के खिलाड़ियों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। हद तो तब हो गयी, जब इस पूरे घटनाक्रम में घायल एक छात्र के सिर पर 14 टांके लगने के बाद भी जवाबदार अधिकारी बेसुध मिले। कोई भी अधिकारी मौके पर घायल बच्चों का हाल जानने नहीं पहुंचे। जिला खेल अधिकारी के.आर.टंडन से जब इस घटना की जानकारी चाही गयी, तो उन्होने कोई जानकारी नही होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।

गौरतलब है कि कोरबा जिला की मेजबानी में विगत 12 अक्टूबर से 25वीं राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। आज 15 अक्टूबर को प्रतियोगिता का समापन किया गया। इस प्रतियोगिता में ओवर आल चैंपियनशीप का खिताब बिलासपुर संभाग ने जीता। चैंपियनशीप की ट्रॉफी मिलने के बाद जहां इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले क्रिकेट, व्हालीबाल, हाॅकी, तैराकी और वाटर पोलो के खिलाड़ियों ने जहां मैदान में ही खुशियां मनायी। वहीं बिलासपुर संभाग के हाॅकी की टीम में शामिल जांजगीर और कोरबा के खिलाड़ी ट्रॉफी अपने पास रखने को लेकर सीएसईबी मैदान में ही भिड़ गये।

किसी तरह मौके पर मौजूद लोगों ने खिलाड़ियों को शांत कराया। इसके बाद विद्युत गृह विद्यायल में जहां बिलासपुर संभाग के खिलाड़ियों को ठहराया गया था, वहां इस विवाद ने दुबारा तूल पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि ट्रॉफी रखने को लेकर कोरबा के खिलाड़ी आयुष और जांजगीर जिला के खिलाड़ी हेमंत के बीच विवाद बढ़ने पर हेमंत ने आयुष सिर पर हाॅकी स्टीक से जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना में आयुष मौके पर ही लहूलुहाल हालत में गिर गया। जिसके बाद उसके साथियों ने तत्काल उसे मेडिकल काॅलेज अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया। जहां उपचार के दौरान उसके सिर पर 14 टांके लगे है।

 

घटना के बाद भी नही पहुंचे जवाबदार अफसर
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे गंभीर पहलू ये है कि जिस कोरबा जिला को इस प्रतियोगिता की मेजबानी की जवाबदारी मिली थी। उसी जिले के जिला खेल अधिकारी सबसे सुस्त और निरंकुश निकले। खिलाड़ियों के बीच हुए खूनी संघर्ष के बाद जहां घायल खिलाड़ी को उसके साथियों ने अस्पताल पहुंचाया। उधर इस पूरे घटनाक्रम से जिला खेल अधिकारी पूरी तरह से अनभिज्ञ बने रहे। इस घटना के संबंध में जब जिला खेल अधिकारी के.आर.टंडन से जानकारी चाही गयी, तो उन्होने ऐसी कोई जानकारी नही होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया।

जिला खेल अधिकारी के इस जवाब से अनुमान लगाया जा सकता है कि मेजबान टीम के जिला खेल अधिकारी कितने जागरूक और सक्रिय है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यहीं है कि यदि इस खूनी संघर्ष में कोई अनहोनि हो जाती, तो इसका जवाबदार कौन होता ? क्या जिला खेल अधिकारी तब भी कोई जानकारी नही होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते ? क्या ऐसे लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई नही होनी चाहिए, जिन्हे अपने ही खिलाड़ियों की हरकत की कोई खबर नही ? खैर इस पूरे घटनाक्रम के बाद जहां जिला अस्पताल पुलिस सहायता केेंद्र ने शून्य में अपराध दर्ज कर लिया है। वहीं दूसरी तरफ अब ये देखने वाली बात होगी कि इस गंभीर लापरवाही पर जिला प्रशासन क्या एक्शन लेता है। ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।

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