
कोरबा, छत्तीसगढ़।कोरबा की शासकीय गौशाला की बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी ने विडंबना की सारी हदें पार कर दी हैं। एक तरफ जहां मृत गौवंश को अमानवीय तरीके से JCB मशीन से उठाकर ठिकाने लगाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पशुओं के परिवहन के लिए बने सरकारी वाहन का उपयोग कथित तौर पर ‘मंत्रियों के कटआउट’ ढोने के लिए किया जा रहा है। इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति पर नगर पालिक निगम कोरबा के सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है, जो निगम प्रशासन की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

📸 पशु वाहन में ‘कटआउट’ बनाम JCB से मृत पशु

सभापति नूतन ठाकुर के बयान और गौशाला की मौजूदा रिपोर्टिंग ने शहर की प्रशासनिक विसंगतियों को उजागर किया है:
* सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग: पशुओं को लाने-ले जाने के लिए आवंटित सरकारी वाहन का इस्तेमाल जनप्रतिनिधियों/मंत्रियों के कटआउट को ढोने के लिए किया जा रहा है, जो संसाधनों के गलत उपयोग को दर्शाता है।
* अमानवीय व्यवहार: वहीं दूसरी ओर, गौशाला में मृत गायों को उठाने के लिए JCB मशीन का सहारा लिया जा रहा है, जो पशुओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार के विपरीत है और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।
> “वह रे कोरबा का दुर्भाग्य! एक तरफ पशु ले जाने वाले वाहन में मंत्रियों के कटआउट, और दूसरी तरफ मृत पशुओं को उठाया जा रहा है JCB से।” – यह विडंबनापूर्ण स्थिति कोरबा की प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर एक तीखा प्रहार है।

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🗣️ सभापति नूतन सिंह ठाकुर का कड़ा रुख: ‘कड़ी कार्रवाई हो’
गौशाला में फिर से गाय की मौत होने की खबर पर सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे ‘दुर्भाग्यजनक’ बताया और संबंधित ठेकेदार व अधिकारियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
* व्यवस्था सुधार के दावे फेल: सभापति ने बताया कि ठेकेदार बदलने और कर्मचारियों की संख्या 4 से बढ़ाकर 20 करने के बावजूद गौशाला में अव्यवस्था बनी हुई है।
* उच्च स्तरीय जांच के निर्देश: उन्होंने आयुक्त को तत्काल उच्च स्तरीय जांच शुरू करने के लिए निर्देशित किया है।
* अधिकारी/ठेकेदार जिम्मेदार: “ऐसी गायों के साथ अगर इस प्रकार का उनके खिलाफ अत्याचार हो रहा है, तो यह बहुत ही ज्यादा दुर्भाग्यजनक है और इसमें जो है कड़ी कार्रवाई संबंधित अधिकारी और ठेकेदार के खिलाफ होनी चाहिए।”

🚫 प्रवेश वर्जित करना निंदनीय
मृत पशुओं को JCB से उठाने की आलोचना के साथ ही, सभापति ने गौशाला में मीडिया और आम नागरिकों के प्रवेश वर्जित किए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नागरिकों को गौमाता की सेवा करने से रोकना गलत है और उनके सहयोग का स्वागत किया जाना चाहिए।

कोरबा निगम प्रशासन पर यह घटना एक बड़ा धब्बा है। गौ संरक्षण और संवर्धन के नाम पर संसाधन और कर्मचारी उपलब्ध होने के बावजूद गौशाला की व्यवस्था क्यों चरमरा रही है, इसका जवाब शहर की जनता को मिलना चाहिए। शहर अब जिम्मेदार अधिकारियों से इस विडंबनापूर्ण स्थिति को सुधारने और ठोस एवं तत्काल कार्रवाई करने की उम्मीद कर रहा है।
