कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में टेंडर घोटाला, नियम ताक पर रखकर फिक्स हुआ सौदा

News Editor
News Editor
3 Min Read
WhatsApp Image 2025-07-20 at 10.53.01_42bc2085
WhatsApp Image 2025-07-20 at 10.53.04_54eddaa3
WhatsApp Image 2025-07-20 at 10.53.03_12ad33f5

 कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में टेंडर घोटाला, नियम ताक पर रखकर फिक्स हुआ सौदा

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित स्व. बिसाहू दास महंत स्मृति मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल में एक बड़ा टेंडर घोटाला सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन पर आरोप है कि 20 एयर कंडीशनर की खरीदी में फर्जीवाड़ा कर एक खास कंपनी को लाभ पहुंचाया गया। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे खेल में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए GeM पोर्टल पर जारी टेंडर में शर्तें इस तरह रखी गईं, जिससे केवल एक कंपनी ही पात्र हो सके।

कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लापरवाही की हद — मरीजों की जान खतरे में, प्रबंधन मौन ! फीमेल वार्ड में ब्लड रिएक्शन मरीज को वक्त पर नर्स न मिली, डॉक्टर ने बचाई जान — महीनों से गैरहाजिरी और मनमानी ड्यूटी का रिकॉर्ड…

ऐसे रचा गया खेल — Non-Inverter AC की शर्त

बाजार में जहां 2 टन का इन्वर्टर AC ₹50,000 में मिल रहा है, वहीं अस्पताल प्रबंधन ने टेंडर में Non-Inverter AC की अनिवार्यता रखी। जानकारी के मुताबिक, फिलहाल केवल Voltas ही Non-Inverter AC बनाती है, जिससे रायपुर की सुप्रीम इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट्स को फायदा दिलाया गया।

EMD में भी अनियमितता

टेंडर की प्रक्रिया में एक और गड़बड़ी सामने आई। GeM पोर्टल पर EMD जमा करने का नियम है, लेकिन सुप्रीम इलेक्ट्रिकल ने EMD ऑफलाइन जमा किया। इसके बावजूद उसे तकनीकी रूप से पात्र घोषित कर बाकी कंपनियों को बाहर कर दिया गया। नियमों के मुताबिक, पहली बार निकली निविदा में कम से कम 3 कंपनियों का तकनीकी रूप से योग्य होना अनिवार्य था, लेकिन यहां केवल एक कंपनी को पास कर दिया गया।

कमीशन का खेल तय

सूत्रों की मानें तो हर AC पर कमीशन का रेट पहले से फिक्स था। अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. गोपाल कंवर और डॉ. राकेश वर्मा पर मिलीभगत के आरोप लगे हैं। बताया गया है कि इस सौदे में मोटा कमीशन लेकर टेंडर का खेल रचा गया।

सरकारी खजाने पर बोझ

विशेषज्ञों के मुताबिक, Non-Inverter AC बिजली की खपत 40-50% ज्यादा करता है। इससे अस्पताल का बिजली बिल कई गुना बढ़ेगा और सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इन्वर्टर AC की बजाय Non-Inverter खरीदने का तर्क भी कहीं से तार्किक नहीं है।

कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्राशाही चरम पर — फर्जी हाजिरी, लापरवाही और मरीजों की जान से खुला खिलवाड़ !

मुख्यमंत्री की चेतावनी भी बेअसर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कुछ दिन पहले ही भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन इस मामले में अब तक कोई जांच नहीं शुरू हुई। न ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है।

जनता के सवाल

  • क्या स्वास्थ्य विभाग इस घोटाले की जांच करेगा?
  • क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
  • क्या कमीशन का खेल यूं ही चलता रहेगा?
Share this Article
Home
Wtsp Group
Search