
रायगढ़, छत्तीसगढ़ – महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड (महाजेनको) ने आज रायगढ़ जिले के तमनार तहसील में स्थित गारे-पल्मा सेक्टर II (GP-II) कोयला खदान का विधिवत कार्य प्रारंभ कर दिया। इस खदान का उद्घाटन महाजेनको के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, श्री बी. राधाकृष्णन (IAS), की उपस्थिति में किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर निदेशक (वित्त) श्री मनीष विश्वनाथ वाघिरकर, निदेशक श्री अभय हरने और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण
यह खदान छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी खदानों में से एक है, जिसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 23.6 मिलियन टन है। यह सीधे तौर पर महाराष्ट्र के प्रमुख थर्मल पावर प्लांट्स जैसे कि चंद्रपुर, कोराडी और पारली को कोयले की आपूर्ति करेगी। इससे राष्ट्रीय ग्रिड में 3200 मेगावाट से अधिक बिजली का योगदान मिलेगा। यह परियोजना भारत की कोयला आयात पर निर्भरता को कम करने और देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
रोजगार और राजस्व के नए अवसर
महाजेनको के अनुसार, इस परियोजना से लगभग 3400 प्रत्यक्ष रोजगार और हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे स्थानीय ग्रामीणों को आजीविका के नए साधन मिलेंगे। खदान के संचालन से छत्तीसगढ़ राज्य को रॉयल्टी, जीएसटी और अन्य करों के रूप में भारी राजस्व भी प्राप्त होगा, जिसका उपयोग सामाजिक कल्याण और क्षेत्रीय विकास के लिए किया जाएगा। महाजेनको के अध्यक्ष श्री बी. राधाकृष्णन ने इस अवसर पर कहा कि कंपनी रोजगार सृजन, राजस्व वृद्धि और सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास में लगातार योगदान देगी।
पर्यावरण संरक्षण पर जोर
महाजेनको ने पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए अपनी प्रतिबद्धता भी जाहिर की है। कंपनी ने अगले 32 वर्षों में 2256.60 हेक्टेयर क्षेत्र में 56.4 लाख स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने का संकल्प लिया है। इस तरह, GP-II परियोजना समावेशी विकास, पर्यावरणीय संतुलन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम है, जो छत्तीसगढ़ राज्य को दीर्घकालिक लाभ प्रदान करेगा।
आज, स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में खदान में ‘बॉक्स कट’ गतिविधि शुरू की गई, जो सतही खनन (ओपन-कास्ट माइन) के लिए एक प्रारंभिक खुदाई होती है। कंपनी ने बताया कि खदान से कोयले का निष्पादन जनवरी 2026 से शुरू होने की योजना है।
