*ग्राम पंचायत सेमीपाली में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: सचिव को तत्काल हटाने की मांग*

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कोरबा, छत्तीसगढ़: जिले की ग्राम पंचायत सेमीपाली के सचिव कविता साहू पर पद का दुरुपयोग, मनमानी कार्यशैली और बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। सरपंच और समस्त ग्रामवासियों ने संयुक्त रूप से कोरबा कलेक्टर को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपकर सचिव को तत्काल हटाने और उनके कार्यकाल की संपूर्ण जांच कराने की मांग की है।

मुख्य शिकायतें और आरोप
​शिकायत पत्रों में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित किया गया है:
पद का दुरुपयोग और मनमानी: आरोप है कि सचिव कविता साहू पिछले 12 वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं और सरपंच के साथ मिलकर मनमाने ढंग से कार्य करती हैं।
​वित्तीय अनियमितता: छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं की जानकारी आम जनता को नहीं दी जाती है। ग्रामवासियों के खाते से पैसा आहरित करने, विगत वर्ष श्मशान घाट और वर्तमान वर्ष सी.सी.रोड निर्माण हेतु पैसे आहरण करने का आरोप है, जबकि मौके पर पर्याप्त निर्माण कार्य नहीं हुआ है।
तालाब गहरीकरण घोटाला: पंचायत द्वारा नाले से मिट्टी निकालकर तालाब गहरीकरण कराया गया, जिसका भुगतान आज तक मजदूरों को नहीं किया गया है। वहीं, गहरीकरण हेतु पूरा पैसा आहरित कर लिया गया और ऐसे मजदूरों के नाम पर फर्जी भुगतान किया गया जिन्होंने मजदूरी की ही नहीं थी।
जानबूझकर जानकारी छिपाना: सचिव पर आरोप है कि वह आए दिन पंचायत के मुख्यालय में अनियमित रूप से आती हैं और कोई भी जानकारी देने से मना कर देती हैं।
रिश्वत और धमकी: शिकायतकर्ता दावा करते हैं कि किसी भी जानकारी या योजना का लाभ लेने के लिए सचिव द्वारा पैसे की मांग (रिश्वत) की जाती है। विरोध करने पर झूठे मामलों में फंसाने और जेल भिजवाने की धमकी भी दी जाती है।
जल जीवन मिशन में धांधली: जल जीवन मिशन के तहत कुल 11 बोर स्वीकार हुए थे, लेकिन सचिव द्वारा केवल 8 और सूरज खुर्द में 3 बोर होना बताया जा रहा है, जबकि गांव में सिर्फ 7 बोर लगे हैं। इस अंतर को लेकर सरपंच और सचिव दबाव डालकर कमीशन के रूप में पैसा ले रहे हैं।
हिसाब-किताब में गड़बड़ी: ग्राम पंचायत सचिव द्वारा विगत वर्ष कराए गए आय-व्यय का कोई हिसाब नहीं दिया गया है। हिसाब मांगने पर धमकियाँ दी गईं।


प्रशासन से अपील
​शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर से अनुरोध किया है कि सचिव को तत्काल बर्खास्त किया जाए और उनके पूरे कार्यकाल की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, शिकायतकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि पूर्व में श्रीमति केवरा बाई और अन्य ग्रामीणों द्वारा शिकायत की गई थी, जिस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, अतः उन शिकायतों की भी जांच की जाए।

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