कोरबा : कोरबा नगर निगम क्षेत्र के वार्ड 62 अंतर्गत सर्वमंगला कनकी मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक जटराज पोखरी में निजी कंपनी द्वारा पर्यावरण नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पोखरी में राखड़ पाटने के उद्देश्य से पिछले एक सप्ताह से 5-6 बड़े मोटर पंपों की सहायता से लाखों लीटर पानी को बाहर निकालकर बर्बाद किया जा रहा है।

नगर पालिक निगम कोरबा के सभापति नूतनसिंह ठाकुर ने इस पूरे मामले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे एक सुनियोजित साजिश करार दिया है। उन्होंने कलेक्टर कोरबा और पर्यावरण संरक्षण अधिकारी को पत्र लिखकर इस अवैध गतिविधि पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया कि यह जलस्रोत पूर्व में खदान था, लेकिन पिछले लगभग 50 वर्षों से यह एक बड़े तालाब का रूप ले चुका है और स्थानीय नागरिकों द्वारा नियमित रूप से घरेलू कार्यों के लिए उपयोग किया जाता रहा है।

सभापति ठाकुर ने बताया कि राज्य सरकार जल स्रोतों के संरक्षण और नए तालाबों के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है और “सरोवर धरोहर” जैसी योजनाएं चला रही है, वहीं कोरबा में ठीक इसके उलट कार्य हो रहा है। जटराज पोखरी में राखड़ पाटने की इस कार्रवाई से न केवल यह जलस्रोत समाप्त हो जाएगा, बल्कि बरसात के मौसम में राखड़ हसदेव नदी में बहकर उसे भी प्रदूषित करेगा। इससे संपूर्ण पर्यावरण तंत्र और जन-स्वास्थ्य पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।

नूतन ठाकुर ने इस घटना को “प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर निजी स्वार्थ पूर्ति का प्रयास” बताया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई पर्यावरणीय असंतुलन का कारण बनती है, जिसकी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर किसकी अनुमति से यह कार्य किया जा रहा है, और दोषी निजी कंपनी एवं संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने प्रशासन से यह भी अपील की है कि तुरंत इस जलस्रोत को नष्ट करने वाली प्रक्रिया को रोका जाए और जटराज पोखरी को संरक्षित किया जाए ताकि भविष्य में जल संकट और पर्यावरणीय क्षति से बचा जा सके।
