*वेदांता की ‘3D’ रणनीति: डीमर्जर, डायवर्सिफिकेशन और डीलीवरेजिंग के दम पर कंपनी को दोगुना करने का लक्ष्य*

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मुंबई, : खनन और धातु क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वेदांता लिमिटेड ने अपनी 60वीं वार्षिक आमसभा (AGM) में कंपनी के भविष्य के विकास के लिए एक महत्वाकांक्षी ‘3D’ रणनीति का अनावरण किया है। कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने घोषणा की कि इस रणनीति में डीमर्जर (Demerger), डायवर्सिफिकेशन (Diversification) और डीलीवरेजिंग (Deleveraging) शामिल हैं, जिनका लक्ष्य वेदांता को अगले कुछ वर्षों में दोगुना करना है। अग्रवाल का मानना है कि यह रणनीति न केवल कंपनी की क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि भारत के आर्थिक और ऊर्जा लक्ष्यों को भी साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
डीमर्जर: व्यवसायों को सशक्त बनाना
अनिल अग्रवाल ने ‘3D’ रणनीति के पहले ‘D’ यानी डीमर्जर पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि वेदांता अपनी कुछ इकाइयों को अलग-अलग स्वतंत्र कंपनियों में विभाजित करेगी। अग्रवाल के अनुसार, डीमर्जर के बाद इनमें से हर एक बिजनेस में $100 बिलियन (लगभग ₹8,35,000 करोड़) की कंपनी बनने की क्षमता है। यह कदम इन व्यवसायों पर बेहतर ध्यान केंद्रित करने और उन्हें तेजी से बढ़ने में मदद करेगा। 99.5% से अधिक शेयरधारकों और लेनदारों की मंजूरी के साथ, वेदांता अपनी वैल्यू-अनलॉक प्रस्ताव को लागू करने के उन्नत चरणों में है। एक बार यह प्रक्रिया पूरी होने पर, शेयरधारकों को प्रत्येक नई विभाजित इकाई में शेयर प्राप्त होंगे। अग्रवाल ने कहा, “हर व्यवसाय को एक नया फोकस, नए निवेशक, और अपनी पूरी क्षमता हासिल करने का एक अनूठा अवसर मिलेगा।”
डाइवर्सिफिकेशन: नए क्षेत्रों में विस्तार
रणनीति का दूसरा ‘D’ डाइवर्सिफिकेशन है, जिसका अर्थ है कि वेदांता अब केवल अपने मौजूदा व्यवसायों पर ही निर्भर नहीं रहेगी। कंपनी की योजना महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals), दुर्लभ धातुओं (rare earths), ऊर्जा बदलाव में काम आने वाली धातुओं, बिजली, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए निवेश करके अपना कारोबार बढ़ाने की है। यह विस्तार कंपनी की आय के स्रोतों में विविधता लाएगा और विकास के नए रास्ते खोलेगा। अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया “रिसोर्स नेशनलिज्म” देख रही है और भारत के आर्थिक भविष्य के लिए प्राकृतिक संसाधनों की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये संसाधन इलेक्ट्रिक वाहन, रिन्यूएबल एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी तकनीकों के लिए कितने आवश्यक हैं।
डीलीवरेजिंग: वित्तीय स्थिति मजबूत करना
तीसरा ‘D’ डीलीवरेजिंग है, जिसका उद्देश्य कंपनी की वित्तीय स्थिति को और मजबूत करने के लिए कर्ज कम करने पर ध्यान केंद्रित करना है। यह कदम वेदांता को भविष्य के निवेश और विकास के लिए अधिक वित्तीय मजबूती प्रदान करेगा। वेदांता का वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है, कंपनी का राजस्व ₹1,50,725 करोड़ और एबिटा ₹43,541 करोड़ रहा, जिससे यह निफ्टी 100 में शीर्ष धन-निर्माताओं में से एक बन गई और शेयरधारकों को कुल 87% का रिटर्न दिया।
भारत के लक्ष्यों से जुड़ा वेदांता का विकास
वेदांता का यह विकास प्लान भारत की आर्थिक और ऊर्जा जरूरतों के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। कंपनी भारत की पहली औद्योगिक जिंक और एल्यूमीनियम पार्क स्थापित करने की भी योजना बना रही है, जिसका उद्देश्य हजारों MSMEs को बढ़ावा देना और लाखों रोजगार के अवसर पैदा करना है। इसके साथ ही, वेदांता ने 1000 डीप-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की घोषणा की है, जिससे भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर को भी गति मिलेगी। अग्रवाल ने बताया कि भारत की भूवैज्ञानिक बनावट संसाधन-समृद्ध देशों जैसे कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के समान है, लेकिन भारत में केवल 25% ही खोजबीन हुई है, जो महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में तेजी से विकास का सही समय है। वेदांता ने भारत में 10 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉक हासिल किए हैं, जो किसी भी निजी क्षेत्र की कंपनी द्वारा सबसे अधिक हैं।
स्थिरता और सामाजिक प्रतिबद्धता
अनिल अग्रवाल ने स्थिरता, प्रौद्योगिकी और सामाजिक विकास के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को भी दोहराया। हिंदुस्तान जिंक को वैश्विक धातु और खनन क्षेत्र में पहला स्थान मिला है, जबकि वेदांता एल्यूमीनियम S&P ग्लोबल कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट 2024 में एल्यूमीनियम श्रेणी में दूसरे स्थान पर है। कंपनी 2050 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसकी प्रमुख सामाजिक प्रभाव पहल, नंद घर, 15 राज्यों में 8,500 केंद्रों को पार कर चुकी है, जो बाल विकास और महिला सशक्तिकरण में सहयोग कर रही है।
अग्रवाल ने भारत में एक विश्वस्तरीय शिक्षा संस्थान, वेदांता यूनिवर्सिटी स्थापित करने के अपने जीवन भर के सपने के बारे में भी बताया, जो हार्वर्ड जैसे संस्थानों से प्रेरित होगी और भारत में वैश्विक स्तर के अनुसंधान और शिक्षा लाएगी।
अंत में, श्री अग्रवाल ने वेदांता के 1 लाख कर्मचारियों के योगदान की सराहना की, जिसमें 22% कर्मचारी और 28% नेतृत्व पदों पर महिलाएं हैं। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक 30% महिला प्रतिनिधित्व प्राप्त करना है।
वेदांता की यह व्यापक रणनीति भारत के आर्थिक विकास और वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति को मजबूत करने के प्रयासों के साथ गहराई से जुड़ी हुई दिखती है।

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