कोरबा, 2 सितंबर 2026। कोरबा में NTPC से निकलने वाली राख के परिवहन को लेकर सामने आया मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। रायपुर-दुर्ग बायपास प्रोजेक्ट के लिए भेजी जाने वाली राख कथित तौर पर निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने के बजाय छुरी गांव की सरकारी जमीन पर डंप किए जाने का मामला सामने आया है। कार्रवाई के दौरान पर्यावरण विभाग ने मौके से राख डंप करते चार ट्रकों को पकड़ा और जांच में बड़ी मात्रा में राख का अवैध तरीके से जमा होना पाया। इसके बाद NTPC प्रबंधन पर 90 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
राख पहुंचनी थी रायपुर-दुर्ग, लेकिन छुरी में खड़ा हो गया पहाड़!

जानकारी के अनुसार NTPC के धनरास राखड़ बांध से राख को NHI के निर्माणाधीन दुर्ग-आरंग-रायपुर बायपास प्रोजेक्ट में उपयोग के लिए भेजा जाना था। इसके लिए परिवहन की जिम्मेदारी ट्रांसपोर्टर को दी गई थी।
आरोप है कि निर्धारित स्थान तक राख पहुंचाने के बजाय राखड़ बांध के नजदीक ही छुरी गांव की सरकारी जमीन पर राख डंप की जाती रही। धीरे-धीरे यहां राख का बड़ा ढेर खड़ा हो गया।

शिकायत के बाद पहुंचा पर्यावरण विभाग, 4 ट्रक पकड़े
मामले की शिकायत स्थानीय ग्रामीणों द्वारा जिला प्रशासन और पर्यावरण विभाग से किए जाने के बाद जांच की गई। विभाग की टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए राख डंप करते चार ट्रकों को पकड़ा।
निरीक्षण में मौके पर 200 से अधिक ट्रक के बराबर राख डंप होने की बात सामने आई। जांच में राख का संबंध NTPC के धनरास राखड़ बांध से पाया गया।

अब सबसे बड़ा सवाल—बिल पास कैसे हुए?
इस पूरे मामले ने NTPC की निगरानी, परिवहन सत्यापन और भुगतान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अगर राख रायपुर-दुर्ग प्रोजेक्ट के लिए भेजी जा रही थी तो—
- क्या ट्रकों की GPS ट्रैकिंग की गई?
- क्या वाहनों के वास्तविक रूट की जांच हुई?
- क्या वजन पर्ची और डिलीवरी रिकॉर्ड का मिलान किया गया?
- क्या निर्धारित प्रोजेक्ट स्थल से राख पहुंचने की पुष्टि ली गई?
- और सबसे बड़ा सवाल—यदि राख निर्धारित गंतव्य तक नहीं पहुंची तो परिवहन के बिलों का भुगतान किस आधार पर किया गया?
₹90 लाख जुर्माने के बाद अब जवाबदेही किसकी?
पर्यावरण विभाग की कार्रवाई के बाद मामला सिर्फ जुर्माने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। राख परिवहन की पूरी प्रक्रिया, पुराने रिकॉर्ड, वाहनों की GPS हिस्ट्री, वजन पर्चियां, डिलीवरी चालान और भुगतान की जांच किए जाने की मांग उठ सकती है।
यदि लंबे समय के रिकॉर्ड का ऑडिट कराया जाए तो यह भी स्पष्ट हो सकता है कि कितनी राख NTPC से निकली, कितनी निर्धारित स्थान तक पहुंची और कितनी राख रास्ते में अथवा अन्य सरकारी जमीनों पर डंप की गई।
फिलहाल छुरी गांव में खड़ा राख का यह पहाड़ सिर्फ पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं, बल्कि निगरानी और भुगतान व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल बन गया है।
हालांकि, कथित करोड़ों रुपये की बोगस बिलिंग और अधिकारियों की संलिप्तता जैसे आरोपों की स्वतंत्र जांच और दस्तावेजी पुष्टि आवश्यक है। NTPC प्रबंधन की ओर से जुर्माने की राशि संबंधित ट्रांसपोर्टर कंपनी से वसूलने की बात कही जा रही है।
🔥 एक्शन के बाद बड़ा सवाल
90 लाख का जुर्माना तो लग गया… लेकिन अगर राख निर्धारित जगह पहुंची ही नहीं, तो परिवहन के भुगतान की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी?


