कोरबा। देश की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों में शुमार बालको तक पहुंचने वाली सड़क की बदहाल तस्वीर अब सिर्फ सड़क की समस्या नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और जिम्मेदार संस्थाओं की जवाबदेही का सवाल बन गई है। जगह-जगह बड़े गड्ढे, जमा पानी, बिखरी गिट्टी और कीचड़ के बीच भारी वाहनों की आवाजाही राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।

तस्वीरें खुद सड़क की स्थिति की कहानी बयां कर रही हैं। कहीं सड़क गड्ढों में तब्दील नजर आ रही है तो कहीं बारिश का पानी गड्ढों को और खतरनाक बना रहा है। इसी रास्ते से रोजाना दोपहिया वाहन, कार, यात्री वाहन और भारी मालवाहक वाहन गुजरते हैं। ऐसे में जरा-सी चूक गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि बालको क्षेत्र में लंबे समय से सड़क की बदहाली के बावजूद जिम्मेदार एजेंसियां आखिर कब गंभीर होंगी? यदि सड़क का रखरखाव किसी सरकारी अथवा स्थानीय एजेंसी के अधीन है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यदि किसी हिस्से की जिम्मेदारी औद्योगिक प्रबंधन से जुड़ी है, तो संबंधित प्रबंधन को भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
जनता पूछ रही है सवाल
क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही सड़क की सुध ली जाएगी?
क्या गड्ढों में तब्दील सड़क की मरम्मत के लिए किसी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है?
भारी वाहनों के दबाव और बारिश के बीच आम राहगीरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
बालको प्रबंधन, प्रशासन और संबंधित सड़क एजेंसी को चाहिए कि वे संयुक्त रूप से सड़क की स्थिति का निरीक्षण कर तत्काल मरम्मत, जल निकासी और यातायात सुरक्षा के ठोस इंतजाम करें।
जनता को विकास चाहिए, लेकिन ऐसा विकास नहीं जिसमें सड़क पर निकलना ही जोखिम बन जाए। अब सवाल सिर्फ सड़क का नहीं—जवाबदेही का है।


