परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल – हादसे में घायल कौन था और ICU में भर्ती कौन हुआ ? सिविल लाइन थाने में शिकायत
कोरबा। शहर में हुए एक सड़क हादसे के बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने इलाज व्यवस्था और प्रभावशाली लोगों को मिलने वाली कथित विशेष सुविधाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि मारुति कार चला रही महिला ने बाइक सवार दो युवकों को टक्कर मार दी, जिसमें दोनों घायल हो गए। लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद पूरा फोकस घायलों से हटकर कार चालक महिला पर केंद्रित हो गया।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि हादसे में चोट युवकों को लगी थी, लेकिन कुछ ही देर में कार चालक महिला को ICU में भर्ती करा दिया गया। दूसरी तरफ घायल युवक उपचार और जांच के लिए भटकते रहे। मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब परिजन महिला से मिलने पहुंचे और उन्हें मोबाइल चलाते हुए देखा।
हादसा हुआ, घायल हुए युवक
जानकारी के मुताबिक शहर में एक मारुति कार की चपेट में आने से रिसदी चौक के पास बाइक सवार दो युवक घायल हो गए। हादसे में युवकों के कंधे, कमर और हथेली में चोटें आईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दुर्घटना के बाद कार चालक महिला स्वयं घायलों को लेकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंची।
शुरुआत में परिजनों को लगा कि महिला मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए घायलों का उपचार कराएगी, लेकिन अस्पताल में प्रवेश करते ही घटनाक्रम ने कथित तौर पर नया मोड़ ले लिया।
घायल बाहर, चालक ICU में ?
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में मौजूद कुछ चिकित्सकों ने महिला को पुलिस केस और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम का हवाला देते हुए ICU में भर्ती करने की सलाह दी। दावा किया गया कि महिला उच्च रक्तचाप की मरीज है और उसे विशेष निगरानी की जरूरत है।
यहीं से सवाल उठने लगे। परिजनों का कहना है कि जिस महिला को ICU में भर्ती किया गया, वह सामान्य रूप से बातचीत कर रही थी और उसकी स्थिति गंभीर नजर नहीं आ रही थी। ऐसे में आखिर किस आधार पर ICU का बेड आवंटित किया गया, यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है।
“हादसे में चोट हमारे बच्चों को लगी थी, लेकिन ICU किसी और को मिल गया।”
मोबाइल चलाते दिखीं महिला, भड़का परिवार
विवाद उस समय और बढ़ गया जब परिजन ICU में भर्ती महिला से मिलने पहुंचे। उनका आरोप है कि वहां महिला मोबाइल फोन का उपयोग करती दिखाई दी। यह देखकर परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल प्रशासन से सवाल पूछना शुरू कर दिया।
परिजनों का कहना है कि यदि महिला की हालत इतनी गंभीर थी कि उसे ICU में भर्ती करना जरूरी था, तो फिर वह सामान्य रूप से मोबाइल कैसे चला रही थी। इसी सवाल को लेकर अस्पताल परिसर में बहस और हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई।
इलाज से ज्यादा ‘सेटिंग’ पर उठे सवाल
पीड़ित परिवार का आरोप है कि महिला के कुछ परिचित अस्पताल में प्रभावशाली स्थिति में हैं और इसी वजह से उसे विशेष सुविधा मिली। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन परिजनों का दावा है कि पूरे घटनाक्रम ने उन्हें यही सोचने पर मजबूर कर दिया।
उनका कहना है कि यदि कोई आम व्यक्ति होता तो क्या उसे भी इतनी आसानी से ICU में भर्ती कर लिया जाता ? यही सवाल अब अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी उठने लगे हैं।
हंगामे के बाद कराया गया एक्स-रे
परिजनों का आरोप है कि उनके घायल बेटों की गंभीरता से जांच तब शुरू हुई जब उन्होंने विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि हंगामा बढ़ने के बाद एक्स-रे सहित अन्य जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।
यही नहीं, परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि उपचार संबंधी दस्तावेजों में उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर दर्शाने का प्रयास किया गया। इस बात से परिवार और अधिक आक्रोशित हो गया।
300 रुपये देकर खत्म करना चाहा मामला ?
पीड़ित परिवार का दावा है कि महिला द्वारा उपचार कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में केवल 300 रुपये दिए गए। परिजनों का कहना है कि यह राशि इलाज तो दूर प्राथमिक जांच के खर्च के लिए भी पर्याप्त नहीं थी।
परिवार का आरोप है कि उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर बताकर मामले को हल्का करने की कोशिश की गई, जबकि वे केवल निष्पक्ष उपचार और न्याय चाहते हैं।
अब जांच की मांग
मामले ने अब अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ICU में भर्ती करने के लिए निर्धारित चिकित्सा मानकों का पालन किया गया? क्या वास्तव में मरीज की स्थिति गंभीर थी? क्या सड़क हादसे के घायलों को प्राथमिकता मिली? और क्या प्रभाव का इस्तेमाल हुआ?
इन सभी सवालों के जवाब तलाशने के लिए पीड़ित परिवार सिविल लाइन थाना पहुंचा और लिखित शिकायत दी। फिलहाल पुलिस मामले की जानकारी जुटा रही है। वहीं अस्पताल प्रबंधन और संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है।
हादसे में घायल युवक थे…
लेकिन सबसे ज्यादा ‘इलाज’ किसे मिला?
यही सवाल अब पूरे मामले के केंद्र में है।

