
कोरबा के बहुचर्चित सुपमा खुसरो हत्याकांड में करीब एक वर्ष बाद तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री मान सुनील कुमार नंदे ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी पति अभिनेक लेदर को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामला पिछले वर्ष 22 जुलाई का है, जिसने पूरे जिले को झकझोर दिया था। गोकुल नगर स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने वाले अभिनेक लेदर पर अपनी पत्नी सुपमा खुसरो की तकिए से मुंह और नाक दबाकर हत्या करने तथा बाद में शव को आग लगाकर साक्ष्य मिटाने का आरोप था। आरोपी ने घटना को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस जांच में पूरे घटनाक्रम का खुलासा हो गया।

इस मामले की विवेचना तत्कालीन सिविल लाइन थाना प्रभारी प्रमोद डडसेना ने की थी। उन्होंने घटनास्थल से जुटाए गए भौतिक साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयान के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ीं। वैज्ञानिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने यह स्थापित किया कि महिला की मौत आग से नहीं, बल्कि पहले दम घुटने से हुई थी और बाद में साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को जलाया गया। इसी मजबूत विवेचना के आधार पर न्यायालय में आरोप सिद्ध हुए। पुलिस ने जांच पूरी कर न्यायालय में मजबूत चालान प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष अतिरिक्त शासकीय अभिभाषक कृष्ण द्विवेदी ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी अभिनेक लेदर के खिलाफ प्रभावी पैरवी की। सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने आरोपी अभिनेक लेदर को दोषी करार देते हुए हत्या के अपराध में आजीवन कारावास तथा साक्ष्य मिटाने के अपराध में तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
इस फैसले के साथ ही लंबे समय से चर्चित इस हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया अपने निर्णायक मुकाम पर पहुंच गई।

