*कोरबा में “सुरक्षित शहर” को लगा ग्रहण: साल भर से बंद पड़े चौक-चौराहों के CCTV कैमरे, अपराधों पर लगाम कैसे?*

Thevoicesnews
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कोरबा,: कोरबा शहर की सुरक्षा व्यवस्था इन दिनों भगवान भरोसे है. शहर के मुख्य चौक-चौराहों पर लगाए गए शासकीय सीसीटीवी कैमरे पिछले एक साल से बंद पड़े हैं, जिससे अपराधों को सुलझाने और अपराधियों को पकड़ने में पुलिस को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. आलम यह है कि किसी आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस को निजी घरों और दुकानों के मालिकों से “कृपया अपने घर का कैमरा दिखा दीजिए” जैसी गुहार लगानी पड़ती है.

“मिशन सिक्योर सिटी” का हश्र: खराब, चोरी या बंद पड़े कैमरे
कुछ समय पहले,

नगर निगम और पुलिस विभाग ने मिलकर “मिशन सिक्योर सिटी” नामक एक महत्वाकांक्षी अभियान शुरू किया था. इस अभियान के तहत शहर के कई प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिसका उद्देश्य शहर को सुरक्षित बनाना और आपराधिक गतिविधियों पर नकेल कसना था.
हालांकि, रखरखाव के अभाव में यह योजना अब दम तोड़ती नज़र आ रही है. लगाए गए कैमरों में से कुछ खराब हो चुके हैं, कुछ की चोरी हो गई है, और जो बचे हैं वे भी बंद पड़े हैं. इस स्थिति से पुलिस को कई बार महत्वपूर्ण मामलों की जांच में भारी दिक्कतें आती हैं. सूत्रों के अनुसार, कई बार शिकायतें और पत्राचार भी किया गया है, लेकिन सारे मामले ठंडे बस्ते में डाल दिए गए हैं.

जिम्मेदार कौन? जब शहर में हो कोई बड़ी वारदात
यह एक गंभीर चिंता का विषय है कि यदि शहर में कोई बड़ी आपराधिक वारदात घटित होती है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? जब निगरानी के मुख्य साधन ही निष्क्रिय पड़े हैं, तो पुलिस कैसे त्वरित कार्रवाई कर पाएगी और अपराधियों को कैसे न्याय के कटघरे में खड़ा करेगी?
शहर के नागरिक होने के नाते यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि जब तक कोई अधिकारी शहर में जिम्मेदार पद पर है, यह शहर उनका भी उतना ही है जितना यहां जन्म लेकर अपनी जीविका चलाने वाले निवासियों का. नागरिकों की सुरक्षा उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है.

नागरिकों की अपील: “ध्यान दें ताकि कोरबा सुरक्षित बन सके”
कोरबा के नागरिकों की ओर से यह निवेदन है कि संबंधित अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल ध्यान दें. इन बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों को जल्द से जल्द चालू कराया जाए और उनके उचित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. तभी हमारा कोरबा सचमुच “सुरक्षित कोरबा” बन सकेगा और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों में कानून का डर बना रहेगा. शहर की सुरक्षा किसी एक विभाग की नहीं, बल्कि सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है.

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