
कोरबा: शांति के टापू कहे जाने वाले कोरबा जिले की फिजा में कुछ ‘रईसजादे’ जहर घोलने का काम कर रहे हैं। ये वे तत्व हैं जो दिन भर तो कुंभकरण की नींद सोते हैं, लेकिन रात होते ही खुद को शहर का ‘डॉन’ समझकर सड़कों पर खूनी खेल खेलने निकल पड़ते हैं। ताज़ा मामला घंटाघर चौक का है, जहाँ नशे में चूर नौजवानों ने अपनी रफ़्तार का कहर बरपाया।
शराब का नशा और रफ़्तार का जुनून
देर रात शराब के नशे में धुत कुछ युवक अपनी तेज़ रफ़्तार कार लेकर निकले। नशा इस कदर हावी था कि उन्हें यह तक सुध नहीं रही कि वे शहर के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग पर चल रहे हैं। नतीजा वही हुआ जिसकी आशंका थी—अनियंत्रित कार सीधे नगर निगम के डिवाइडर में जा घुसी। टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए।

होशियारी पड़ी भारी: नंबर प्लेट निकालकर भागने की थी फिराक
हादसे के बाद होश ठिकाने आने के बजाय इन युवकों ने अपनी ‘रईसजादी’ दिखानी शुरू की। उन्होंने किसी जिम्मेदार गार्जियन को बुलाने के बजाय अपने कुछ रसूखदार दोस्तों को फोन किया। मौके पर पहुँचते ही सबसे पहले गाड़ी की नंबर प्लेट उखाड़ दी गई, ताकि पहचान छुपाई जा सके। लेकिन ये ‘रील’ के हीरो यह भूल गए कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं।

मानिकपुर पुलिस के उड़े होश, शराब की बोतलें बरामद
सूचना मिलते ही डायल 112 और मानिकपुर चौकी पुलिस मौके पर पहुँची। घटनास्थल का मंजर देखकर पुलिस भी दंग रह गई। कार के भीतर और आसपास शराब की बोतलें बिखरी पड़ी थीं। कुछ लोग मामले को ‘खानापूर्ति’ कर रफा-दफा करने की कोशिश में जुटे थे और इसे महज़ एक साधारण हादसा बताने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस के जवानों ने उनकी चालाकी को भांप लिया और शराब की बोतलों समेत वाहन को ज़ब्त कर लिया।

SP सिद्धार्थ तिवारी का कड़ा रुख: अब रसूख नहीं, कानून चलेगा
सोशल मीडिया पर 23 सेकंड की रील देखने और पुलिस की 1 साल की कड़ी ट्रेनिंग में बड़ा फर्क होता है। इन युवकों को लगा कि साक्ष्य छुपाकर वे बच निकलेंगे, लेकिन पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने मामले को गंभीरता से संज्ञान में लिया है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर मातहतों को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि ऐसे ‘रईसजादों’ पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए, चाहे वे किसी भी जुगाड़ में क्यों न लगे हों।

बड़ा सवाल: क्या इन रईसजादों का रसूख कानून से ऊपर है? क्या पुलिस की मुस्तैदी इन सड़कों पर घूमने वाले ‘नशेड़ी शेरों’ का शिकार करेगी? फिलहाल मामले में जांच जारी है और पुलिस सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई की तैयारी में है।

‘रईसजादों’ का हाईवोल्टेज ड्रामा: शराब के नशे में डिवाइडर पर चढ़ाई कार, फिर सबूत मिटाने के लिए उखाड़ी नंबर प्लेट!
कोरबा: शांति के टापू कहे जाने वाले कोरबा जिले की फिजा में कुछ ‘रईसजादे’ जहर घोलने का काम कर रहे हैं। ये वे तत्व हैं जो दिन भर तो कुंभकरण की नींद सोते हैं, लेकिन रात होते ही खुद को शहर का ‘डॉन’ समझकर सड़कों पर खूनी खेल खेलने निकल पड़ते हैं। ताज़ा मामला घंटाघर चौक का है, जहाँ नशे में चूर नौजवानों ने अपनी रफ़्तार का कहर बरपाया।
शराब का नशा और रफ़्तार का जुनून
देर रात शराब के नशे में धुत कुछ युवक अपनी तेज़ रफ़्तार कार लेकर निकले। नशा इस कदर हावी था कि उन्हें यह तक सुध नहीं रही कि वे शहर के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग पर चल रहे हैं। नतीजा वही हुआ जिसकी आशंका थी—अनियंत्रित कार सीधे नगर निगम के डिवाइडर में जा घुसी। टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए।

होशियारी पड़ी भारी: नंबर प्लेट निकालकर भागने की थी फिराक
हादसे के बाद होश ठिकाने आने के बजाय इन युवकों ने अपनी ‘रईसजादी’ दिखानी शुरू की। उन्होंने किसी जिम्मेदार गार्जियन को बुलाने के बजाय अपने कुछ रसूखदार दोस्तों को फोन किया। मौके पर पहुँचते ही सबसे पहले गाड़ी की नंबर प्लेट उखाड़ दी गई, ताकि पहचान छुपाई जा सके। लेकिन ये ‘रील’ के हीरो यह भूल गए कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं।

मानिकपुर पुलिस के उड़े होश, शराब की बोतलें बरामद
सूचना मिलते ही डायल 112 और मानिकपुर चौकी पुलिस मौके पर पहुँची। घटनास्थल का मंजर देखकर पुलिस भी दंग रह गई। कार के भीतर और आसपास शराब की बोतलें बिखरी पड़ी थीं। कुछ लोग मामले को ‘खानापूर्ति’ कर रफा-दफा करने की कोशिश में जुटे थे और इसे महज़ एक साधारण हादसा बताने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस के जवानों ने उनकी चालाकी को भांप लिया और शराब की बोतलों समेत वाहन को ज़ब्त कर लिया।
SP सिद्धार्थ तिवारी का कड़ा रुख: अब रसूख नहीं, कानून चलेगा

सोशल मीडिया पर 23 सेकंड की रील देखने और पुलिस की 1 साल की कड़ी ट्रेनिंग में बड़ा फर्क होता है। इन युवकों को लगा कि साक्ष्य छुपाकर वे बच निकलेंगे, लेकिन पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने मामले को गंभीरता से संज्ञान में लिया है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर मातहतों को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि ऐसे ‘रईसजादों’ पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए, चाहे वे किसी भी जुगाड़ में क्यों न लगे हों।
बड़ा सवाल: क्या इन रईसजादों का रसूख कानून से ऊपर है? क्या पुलिस की मुस्तैदी इन सड़कों पर घूमने वाले ‘नशेड़ी शेरों’ का शिकार करेगी? फिलहाल मामले में जांच जारी है और पुलिस सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई की तैयारी में है।
