कोरबा। शनिवार की सुबह डॉ. भीमराव अंबेडकर स्टेडियम का माहौल रोज़ की तुलना में कुछ अलग था। हाथों में हरियाली का संदेश लिए स्कूली बच्चे, खेल परिधान में युवा, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक एक ही उद्देश्य के साथ जुटे थे—कोरबा को अधिक हरा-भरा बनाने का संकल्प।

मौका था जिला प्रशासन द्वारा आयोजित ‘रन फॉर ग्रीन’ मैराथन का, जिसे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जोड़कर शुरू किया गया।
हरियाली के संदेश के साथ दौड़ी मैराथन
कार्यक्रम की शुरुआत स्कूली बच्चों की जोशीली जुम्बा प्रस्तुति से हुई, जिसने पूरे स्टेडियम में उत्साह का माहौल बना दिया। इसके बाद महापौर संजु देवी राजपूत और कलेक्टर कुणाल दुदावत ने हरी झंडी दिखाकर मैराथन को रवाना किया।

शहर की सड़कों पर दौड़ते प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण के संदेश लिखी तख्तियां और नारों के माध्यम से लोगों से पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की अपील की।
सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहेगा अभियान
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान 15 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान स्कूलों, अस्पतालों, सरकारी परिसरों, सार्वजनिक स्थानों और सड़क किनारे बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा।

कलेक्टर का कहना है
“हमारी प्राथमिकता केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें जीवित रखना भी है, ताकि आने वाले वर्षों में इसका वास्तविक लाभ लोगों को मिल सके।”
किरण पिस्दा की मौजूदगी बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम में भारतीय महिला फुटबॉल टीम की खिलाड़ी किरण पिस्दा भी शामिल हुईं। उनके साथ दौड़ लगाने और तस्वीरें खिंचवाने के लिए युवाओं में खासा उत्साह दिखाई दिया।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक संस्था की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। यदि हर व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे, तो इसका सकारात्मक असर आने वाली पीढ़ियों तक दिखाई देगा।
कोरबा के लिए इसलिए अहम है यह पहल
कोयला उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों के कारण कोरबा लंबे समय से प्रदूषण की चुनौती झेलता रहा है। ऐसे में हरियाली बढ़ाने और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने वाली पहलें जिले के लिए विशेष महत्व रखती हैं।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि पौधारोपण अभियान की असली सफलता तभी मानी जाएगी, जब लगाए गए पौधों की नियमित निगरानी और संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए।
जिला प्रशासन का दावा है कि इस बार अभियान को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि जनभागीदारी के माध्यम से इसे स्थायी हरित आंदोलन का रूप देने का प्रयास किया जाएगा। अब यह देखने वाली बात होगी कि अगले दो महीनों में लगाए जाने वाले पौधे आने वाले वर्षों में कोरबा की हरियाली को कितना विस्तार दे पाते हैं।

