भालूसटका में लाइन सुधारते समय करंट की चपेट में आया कर्मचारी, शहर अंधेरे में डूबा रहा और जिम्मेदार अफसर नदारद
कोरबा। तेज आंधी-तूफान के बाद जहां पूरा शहर बिजली संकट से जूझ रहा है, वहीं विद्युत वितरण विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। विभाग का एक कर्मचारी लाइन सुधारने के दौरान करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया, लेकिन आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके की गंभीरता को समझने के बजाय निजी कार्यक्रमों में व्यस्त रहे।
जानकारी के अनुसार विद्युत वितरण विभाग के पाड़ीमार जोन में कार्यरत लाइनमैन तरुण भालूसटका क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बहाल करने का कार्य कर रहा था। इसी दौरान ऊंचे बिजली पोल पर काम करते समय वह अचानक करंट की चपेट में आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार करंट का झटका इतना तेज था कि उसकी पीठ सहित शरीर के कई हिस्से बुरी तरह झुलस गए।
तूफान के बाद बिजली बहाली में जुटा था कर्मचारी
बीते कई घंटों से आंधी-तूफान के कारण शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित थी। ऐसे में विभागीय कर्मचारी लगातार फील्ड में काम कर रहे थे। इसी दौरान लाइनमैन तरुण को भालूसटका क्षेत्र में खराब लाइन सुधारने भेजा गया था। काम के दौरान हुए हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था और कार्य परिस्थितियों को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
साथी कर्मियों ने पहुंचाया अस्पताल
हादसे के तुरंत बाद साथी कर्मचारियों ने घायल लाइनमैन को नीचे उतारा और आनन-फानन में बालको अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है। बताया जा रहा है कि कर्मचारी गंभीर रूप से झुलसा है और चिकित्सक उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
कर्मचारी अस्पताल में, अधिकारी कार्यक्रम में?
घटना के बाद सबसे ज्यादा चर्चा पाड़ीमार जोन के सहायक अभियंता कृष्णा जोशी की भूमिका को लेकर हो रही है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि जब एक कर्मचारी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था, तब जोन प्रभारी एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंच गए। यदि यह आरोप सही है तो यह न केवल प्रशासनिक संवेदनहीनता का मामला है, बल्कि फील्ड में जान जोखिम में डालकर काम करने वाले कर्मचारियों के मनोबल पर भी सीधा प्रहार माना जाएगा।
“लाइनमैन खंभे पर जान जोखिम में डालकर काम करें और अधिकारी एसी हॉल में कार्यक्रमों का आनंद लें, यह व्यवस्था आखिर कब बदलेगी?”
पूरा शहर परेशान, जिम्मेदारों का पता नहीं
तूफान के बाद शहर के कई हिस्सों में घंटों से बिजली गुल रही। बुधवारी बस्ती के रहवासियों का आरोप है कि दोपहर करीब 2 बजे एबी केबल का छोटा हिस्सा जल गया था, लेकिन रात 11 बजे तक उसे सुधारने कोई टीम नहीं पहुंची। परिणामस्वरूप सैकड़ों परिवार भीषण गर्मी और अंधेरे में रहने को मजबूर रहे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभाग समय पर टीम भेज देता तो समस्या कुछ ही मिनटों में दूर हो सकती थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण लोगों को पूरी रात परेशान होना पड़ा।
सवाल जिनका जवाब जरूरी है
- लाइनमैन को करंट कैसे लगा, क्या सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था?
- घटना के समय जोन प्रभारी कहां थे?
- घायल कर्मचारी का हाल जानने कितने अधिकारी अस्पताल पहुंचे?
- बुधवारी बस्ती समेत कई क्षेत्रों में घंटों बिजली बहाल क्यों नहीं हो सकी?
- क्या विभाग इस पूरे मामले की जांच कराएगा?
एक कर्मचारी झुलस गया…
शहर अंधेरे में डूबा रहा…
और सवालों के घेरे में आ गया पूरा सिस्टम।

