शाम 6 बजते ही मैदान में उतर जाते हैं ASP लखन पटले और CSP प्रतीक चतुर्वेदी, रात 12 बजे तक मोर्चा संभालते हैं अधिकारी; सुभाष चौक बना कैम्प कार्यालय, हर आधे घंटे में गलियों तक पहुंच रही बाइक पेट्रोलिंग
कोरबा। नवरात्रि है, गरबे की धूम है, बाजारों में रौनक है और शहर में त्योहार का रंग चढ़ा हुआ है। कहीं गरबा पंडालों में कदम थिरक रहे हैं, तो कहीं परिवार खरीदारी और घूमने निकल रहे हैं। लेकिन इस जश्न के बीच अगर किसी ने हुड़दंग मचाने, लड़कियों से छेड़छाड़ करने या माहौल बिगाड़ने की सोची है, तो उसे अपनी योजना पर दोबारा विचार कर लेना चाहिए। वजह है—कोरबा पुलिस की त्योहार स्पेशल चौकसी !
यहां कहानी सिर्फ थाने में बैठकर निर्देश देने तक सीमित नहीं है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी खुद सड़कों पर उतरकर व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी की रणनीति के तहत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले और सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी रोजाना शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक मैदानी मोर्चा संभाल रहे हैं। यानी जब शहर उत्सव के मूड में होता है, तब पुलिस भी अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए पूरी तरह सक्रिय रहती है।
शाम 6 बजे से शुरू होता है पुलिस का ‘नाइट वॉच’
त्योहारों में भीड़ बढ़ते ही असामाजिक तत्वों के सक्रिय होने की आशंका भी बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने शाम से देर रात तक निगरानी का इंतजाम किया है। अधिकारियों की मौजूदगी का मकसद साफ है—किसी को बेवजह परेशान न होने देना और किसी को दूसरों की खुशी में खलल डालने की छूट न देना।
गरबा खेलने वालों के लिए उत्सव, हुड़दंगियों के लिए चेतावनी! पुलिस की इस व्यवस्था में प्रमुख मार्गों के साथ उन इलाकों पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जहां भीड़ का फायदा उठाकर मनमानी करने की कोशिश हो सकती है।
सुभाष चौक बना पुलिस का ‘कंट्रोल पॉइंट’
शहर के सुभाष चौक को कैम्प कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां से अधिकारी हालात पर नजर रखने और जरूरत के मुताबिक पुलिसकर्मियों को निर्देशित करने में जुटे हैं। यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि त्योहार के दौरान केवल एक-दो प्रमुख चौक पर मौजूदगी काफी नहीं होती। भीड़ के बीच किसी जगह परेशानी पैदा हो, तो पुलिस को तेजी से प्रतिक्रिया देने की जरूरत होती है।
हर आधे घंटे में बाइक पेट्रोलिंग, गलियों में भी दस्तक
पुलिस की रणनीति का सबसे दिलचस्प पहलू है बाइक पेट्रोलिंग। करीब हर आधे घंटे में पुलिस की मूवमेंट रखने का लक्ष्य है, ताकि निगरानी केवल मुख्य सड़कों तक सीमित न रहे। गलियों और संपर्क मार्गों तक पुलिस की आवाजाही से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिल सकती है।
सीधे शब्दों में कहें तो पुलिस का संदेश है—भीड़ में छिपकर मनमानी करने का भरोसा मत पालिए, निगरानी हर तरफ है!
त्योहार से पहले ही समझा दिया था अंजाम
त्योहार शुरू होने से पहले पुलिस ने बदमाशों और असामाजिक तत्वों की परेड लेकर उन्हें सख्त हिदायत दी थी। उन्हें स्पष्ट कर दिया गया था कि नवरात्रि और गरबा की आड़ में हुड़दंग, छेड़छाड़, मारपीट या शांति भंग करने की कोशिश की गई, तो कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
पुलिस की इस रणनीति का मकसद किसी को डराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि आम नागरिक बिना किसी परेशानी के त्योहार मना सकें।
चार दिन शांतिपूर्ण गरबा, आगे भी यही रफ्तार जरूरी
नवरात्रि और गरबा के चार दिन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होना राहत की बात है। लेकिन पुलिस की असली परीक्षा पूरे त्योहार के दौरान इसी व्यवस्था को बनाए रखने में है। भीड़ बढ़ने, देर रात आवाजाही और आयोजन स्थलों पर लोगों की मौजूदगी के बीच लगातार निगरानी जरूरी है।
SP सिद्धार्थ तिवारी की रणनीति के तहत अधिकारियों की मैदानी मौजूदगी और पेट्रोलिंग आगे भी कितनी प्रभावी रहती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
कोरबा पुलिस का संदेश—जश्न में शामिल होइए, बवाल में नहीं!
नवरात्रि खुशियों का त्योहार है। परिवारों को गरबा देखने और खेलने, बाजार जाने तथा देर शाम घूमने के दौरान सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए। यही वजह है कि पुलिस की सक्रियता का सबसे बड़ा फायदा आम नागरिकों को मिल सकता है।
फिलहाल कोरबा में गरबा की ताल पर कदम थिरक रहे हैं और पुलिस की नजर शांति बनाए रखने पर है। जो त्योहार मनाने निकले हैं, वे बेफिक्र होकर उत्सव का आनंद लें। लेकिन जिसने माहौल बिगाड़ने की सोची, उसके लिए पुलिस की चेतावनी साफ है—खुशियों के इस त्योहार में हुड़दंग की जगह नहीं!
