*खबर का असर: ‘शराब’ ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार, 21 साल के सत्यम की मौत के बाद जागे अपने!*

Thevoicesnews
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कोरबा। मीडिया की खबरों का एक बड़ा असर देखने को मिला है। मेडिकल कॉलेज की मर्चुरी में दो दिनों से लावारिस पड़े 21 वर्षीय सत्यम के शव को आखिरकार उसके अपनों का कंधा नसीब हो गया। खबर प्रकाशित होने के बाद सत्यम के दादा और समाज के लोग अस्पताल पहुंचे और नम आंखों से उसका शव लेकर अंतिम संस्कार के लिए रवाना हुए।


नशे की भेंट चढ़ी जवानी: अपनों से हुई थी दूरी
परिजनों ने अस्पताल पहुँचकर जो दास्तां सुनाई, वह समाज के लिए एक कड़वा सबक है। 21 साल की उम्र, जो करियर बनाने की होती है, उसमें सत्यम शराब की दलदल में फंस चुका था।
अकेलापन: सत्यम के माता-पिता का पहले ही स्वर्गवास हो चुका था।
ठुकराई नसीहत: वह अपने दादा के साथ रहता था। दादा और रिश्तेदारों ने कई बार उसे शराब छोड़ने की मिन्नतें कीं, लेकिन सत्यम ने अपनों की सलाह के बजाय नशे को चुना।
सामाजिक बहिष्कार: शराब की लत के कारण वह धीरे-धीरे परिवार और समाज से पूरी तरह कट गया था और अलग रहने लगा था।

दादा की मार्मिक अपील: “नशा सिर्फ इंसान को नहीं, रिश्तों को भी मार देता है”
सत्यम के दादा ने रुंधे गले से बताया कि समाचार के माध्यम से उन्हें पोते की मौत की सूचना मिली। वे समाज के लोगों को लेकर तुरंत अस्पताल पहुँचे। उन्होंने समाज के युवाओं को संदेश देते हुए कहा:
“नशा एक इंसान को उसके परिवार और समाज से कोसों दूर कर देता है। आज मेरा पोता हमारे बीच होता, अगर उसने शराब न चुनी होती। मैं हाथ जोड़कर अपील करता हूँ कि लोग नशे से दूर रहें।”

समाज ने उठाया अंतिम संस्कार का बीड़ा
भले ही सत्यम जीते जी राह भटक गया था, लेकिन उसकी मौत के बाद उसके रिश्तेदारों और समाज के लोगों ने इंसानियत का धर्म निभाया। समाज के लोग सत्यम का शव लेकर उसके गृहग्राम रवाना हुए, जहाँ ससम्मान उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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