

कोरबा। शहर में सरकारी विभागों की आपसी खींचतान के बीच हजारों लोगों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। बाई तट नहर के किनारे बनी रिटर्निंग वॉल करीब एक किलोमीटर तक टूटकर नहर में समा चुकी है। कई स्थानों पर दीवार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे सड़क का किनारा बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

सुनालिया पुल से रेलवे स्टेशन जाने वाले इस मार्ग पर प्रतिदिन हजारों लोगों और वाहनों की आवाजाही होती है। दिन के समय तो लोग किसी तरह रास्ते की स्थिति देखकर निकल जाते हैं, लेकिन रात में यह मार्ग बेहद जोखिम भरा हो जाता है। सड़क के ठीक किनारे गहरी नहर है और लोगों की सुरक्षा के लिए बनाई गई दीवार कई जगह गायब है। ऐसे में जरा सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

### नौ साल पहले बनी थी नई दीवार, अब फिर जर्जर
बताया जा रहा है कि करीब नौ साल पहले पुरानी और जर्जर रिटर्निंग वॉल को हटाकर नगर निगम ने नई दीवार का निर्माण कराया था। वहीं नहर और उससे जुड़े कार्य जल संसाधन विभाग के अधीन बताए जाते हैं। अब जब नई दीवार भी क्षतिग्रस्त हो गई है, तो इसकी मरम्मत और निर्माण की जिम्मेदारी को लेकर दोनों विभागों के बीच पत्राचार चल रहा है।

नगर निगम की ओर से जल संसाधन विभाग को दीवार दुरुस्त कराने के लिए पत्र लिखा जा रहा है, जबकि विभाग की ओर से जवाब में दीवार नगर निगम को हैंडओवर किए जाने की बात कही जा रही है। इस आपसी खींचतान के बीच मौके पर सुरक्षा व्यवस्था और मरम्मत का इंतजार बना हुआ है।
सभापति ने जताई नाराजगी, कलेक्टर ने दिए निर्देश

मामले को लेकर नगर निगम सभापति नूतन ठाकुर ने नाराजगी जताई है। उन्होंने संभावित हादसे की आशंका को देखते हुए तत्काल जरूरी कदम उठाने की आवश्यकता बताई है।

वहीं कलेक्टर कुणाल दुदावत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम और जल संसाधन विभाग को आपसी सामंजस्य बनाकर समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बरसात के बाद रिटर्निंग वॉल के निर्माण के निर्देश जारी किए गए हैं।

निर्माण तक लोगों की सुरक्षा कौन करेगा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बरसात के बाद निर्माण शुरू होने तक इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी? जब सड़क के किनारे गहरी नहर हो और सुरक्षा दीवार ही टूट चुकी हो, तो केवल भविष्य में निर्माण का भरोसा पर्याप्त नहीं है।
फिलहाल जरूरत है कि दुर्घटना की आशंका वाले हिस्सों में तत्काल बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेतक और रात में पर्याप्त रोशनी जैसी अस्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जाए, ताकि विभागीय जिम्मेदारी तय होने और स्थायी निर्माण शुरू होने तक किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।
