सोता रहा गार्ड और भर्ती के 18 घंटे के भीतर फरार हो गया अपचारी , अस्पताल प्रबंधन और बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा की खुली पोल , जिम्मेदार कौन ?

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कोरबा। जिले के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है , जहां बाल संप्रेक्षण गृह में निरुद्ध 17 वर्षीय अपचारी बालक भर्ती के महज 18 घंटे के भीतर अस्पताल से फरार हो गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बालक के हाथ में कैनुला और शरीर में कैथिएटर लगे होने के बावजूद वह आसानी से अस्पताल से निकल गया और वहां तैनात गार्ड को इसकी भनक तक नहीं लगी।

जानकारी के अनुसार , अपचारी बालक को शुक्रवार 27 मार्च को फिनाइल पीने के बाद गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आपातकालीन उपचार के बाद उसे वार्ड में शिफ्ट किया गया , जहां उसका इलाज जारी था। लेकिन शनिवार सुबह होते-होते , यानी भर्ती के करीब 18 घंटे के भीतर ही वह अस्पताल से गायब हो गया।

घटना का खुलासा तब हुआ , जब वार्ड में मौजूद स्टाफ ने बालक को बिस्तर पर नहीं पाया। पहले तो अस्पताल कर्मियों ने आसपास तलाश की , लेकिन जब कहीं कोई सुराग नहीं मिला तो हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पूरे अस्पताल परिसर में खोजबीन की गई , लेकिन तब तक बालक फरार हो चुका था।

सबसे बड़ा सवाल : निगरानी थी या औपचारिकता ?

जिस अपचारी बालक को विशेष निगरानी में रखा जाना था , वह इतनी आसानी से कैसे फरार हो गया ? जानकारी के अनुसार , बालक के साथ बाल संप्रेक्षण गृह का एक गार्ड तैनात था , लेकिन वह भी इस पूरी घटना से अनजान रहा। ऐसे में “सोता रहा गार्ड” वाली स्थिति ने पूरे सिस्टम की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है।

पुलिस को सूचना नहीं , नियमों की अनदेखी

भर्ती से पहले सभी प्रक्रियाओं का पालन करने की बात भले ही कही जा रही हो , लेकिन पुलिस को समय पर सूचना न देना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। नियमों के अनुसार किसी भी निरुद्ध या अपचारी को अस्पताल में भर्ती कराने की स्थिति में पुलिस को सूचित करना अनिवार्य होता है , लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बाल संप्रेक्षण गृह के जिम्मेदार अधिकारी अपना अलग “पैरलल सिस्टम” चला रहे हैं , जहां सिर्फ एक गार्ड के भरोसे इतने बड़े अस्पताल में अपचारी बालक को छोड़ दिया गया ?

पहले भी वीआईपी ट्रीटमेंट का मामला

यह भी उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले इसी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक ठगी के आरोपी को कथित तौर पर वीआईपी ट्रीटमेंट देते हुए अलग से कमरा उपलब्ध कराया गया था। ऐसे में यह सवाल और भी गहरा हो जाता है कि क्या नियम और व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित हैं , और जमीनी स्तर पर मनमानी चल रही है ?

अस्पताल प्रशासन का पक्ष

इस संबंध में असिस्टेंट मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. रविकांत जाटवर ने बताया कि 27 मार्च को नाबालिग को भर्ती किया गया था। प्रारंभिक उपचार के बाद उसे वार्ड में रखा गया था , जहां से वह शनिवार सुबह कहीं चला गया। तलाश के बाद जब वह नहीं मिला , तब जिला अस्पताल चौकी को मेमो भेजा गया है।

पहले भी फरारी के मामले , फिर भी सबक नहीं

गौरतलब है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बाल संप्रेक्षण गृह से अपचारी बालकों के फरार होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं , लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं किया गया।

जिम्मेदार कौन ?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस पूरे मामले के लिए जिम्मेदार कौन है ? क्या सिर्फ जांच और कागजी कार्रवाई कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा , या फिर वास्तव में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी ? फिलहाल पुलिस फरार अपचारी बालक की तलाश में जुटी हुई है।

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