मेडिकल कॉलेज अस्पताल से सामने आया संवेदनशील मामला, मासूम की खरीदी-बिक्री की आशंका पर चर्चाएं तेज
कोरबा। जिले के मेडिकल कॉलेज अस्पताल से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रसव के कुछ ही देर बाद महिला की मौत हो गई। पत्नी की मौत के बाद पिता ने नवजात शिशु को अपने साथ ले जाने से इंकार कर दिया और बाद में उसे संजीवनी एक्सप्रेस के चालक के हवाले कर दिया। मामले ने तब गंभीर मोड़ ले लिया जब दोनों पक्षों के बीच तीन लाख रुपये के लेनदेन से जुड़ा शपथ पत्र और इकरारनामा सामने आया। इसके बाद पूरे घटनाक्रम को नवजात की कथित खरीदी-बिक्री से जोड़कर देखा जा रहा है।

जानकारी के अनुसार करतला थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम तुर्री कटरा निवासी सरजू प्रसाद राठिया अपनी पत्नी रमशीला राठिया को प्रसव पीड़ा होने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचा था। शुक्रवार तड़के अस्पताल में महिला ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया, लेकिन प्रसव के कुछ देर बाद ही उसकी हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पत्नी की मौत के बाद सरजू प्रसाद शव को गांव ले जाने के लिए तैयार था, लेकिन उसने नवजात को साथ रखने से साफ इनकार कर दिया। उसने तर्क दिया कि पहली पत्नी से उसके पहले ही दो बच्चे हैं। अस्पताल प्रबंधन और अधिकारियों के सामने नवजात की देखरेख को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई।

कुछ समय बाद परिजन अस्पताल पहुंचे, लेकिन उन्होंने भी बच्चे को अपने साथ रखने में रुचि नहीं दिखाई। इसी दौरान सरजू ने संजीवनी एक्सप्रेस चालक निर्मल कुमार राठौर से संपर्क किया। बताया जा रहा है कि निर्मल शादी के 13 साल बाद भी नि:संतान है, जिसके चलते उसने नवजात को अपने साथ रखने की इच्छा जताई।
मामले में सबसे अहम पहलू वह शपथ पत्र और अनुबंध सह इकरारनामा है, जिसमें निर्मल द्वारा सरजू को दो लाख रुपये ऑनलाइन और एक लाख रुपये नगद उधार देने का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज में कुछ शर्तें भी दर्ज हैं और नोटरी के समक्ष दोनों पक्षों व गवाहों के हस्ताक्षर किए गए हैं। दस्तावेज सामने आने के बाद पूरे मामले में नवजात की कथित सौदेबाजी की आशंका गहरा गई है।

अस्पताल के बाहर सौंपा गया नवजात
सूत्रों के अनुसार मीडिया की नजरों से बचने के लिए दोनों पक्षों ने अस्पताल परिसर के बाहर योजना के तहत नवजात को सौंपा। परिजन शव लेकर गांव रवाना हो गए, जबकि संजीवनी चालक बच्चे को अपने साथ ले गया।
पते को लेकर भी उठे सवाल
इकरारनामे में सरजू प्रसाद का पता इंदिरा गांधी शासकीय अस्पताल परिसर का क्वार्टर नंबर 7 दर्ज किया गया है, जबकि वह वास्तविक रूप से ग्राम तुर्री कटरा का निवासी है। अस्पताल कॉलोनी में सामान्यतः अधिकारी और कर्मचारी ही निवास करते हैं। ऐसे में दस्तावेज में दर्ज पते को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

निर्मल का पक्ष
संजीवनी चालक निर्मल कुमार राठौर का कहना है कि नवजात के पिता ने बच्चे की बेहतर परवरिश के लिए उसे सौंपा है। उसके अनुसार पिता ने पहले कुछ रकम की मांग की थी, लेकिन बाद में परिजनों ने पैसे लेने से मना कर दिया। निर्मल ने यह भी दावा किया कि तीन लाख रुपये वाला इकरारनामा बाद में फाड़ दिया गया।
फिलहाल मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। संवेदनशीलता को देखते हुए लोगों की नजर प्रशासन और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
