औद्योगिक नगरी कोरबा में कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जिले को “नेक्स्ट जनरेशन डायल-112” योजना के तहत 22 नई हाईटेक इमरजेंसी रिस्पॉन्स वाहन मिली हैं। अत्याधुनिक तकनीक से लैस इन वाहनों को सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में श्रम, आबकारी एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, महापौर संजू देवी राजपूत, कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, कलेक्टर कुणाल दुदावत और पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
कार्यक्रम में पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, पुलिस जवान और बड़ी संख्या में आम नागरिक मौजूद रहे। नई गाड़ियों के शामिल होने के बाद जिले में आपातकालीन रिस्पॉन्स सिस्टम पहले से अधिक आधुनिक, तेज और तकनीकी रूप से सक्षम माना जा रहा है।
आधुनिक तकनीक से लैस हैं नई डायल-112 गाड़ियां
पुलिस विभाग के अनुसार “नेक्स्ट जनरेशन डायल-112” के तहत मिली इन नई गाड़ियों में कई अत्याधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। इनमें GPS ट्रैकिंग सिस्टम, AI बेस्ड लोकेशन ट्रेसिंग, डैश कैम, PTZ कैमरा, वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम, लाइव मॉनिटरिंग और डिजिटल रिस्पॉन्स सिस्टम जैसी तकनीक शामिल है।
इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा और संवेदनशील परिस्थितियों में त्वरित मदद उपलब्ध कराने के लिए विशेष SOS फीचर भी जोड़ा गया है। कंट्रोल रूम से इन वाहनों की लाइव ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग की जा सकेगी, जिससे किसी भी घटना स्थल तक पहुंचने में लगने वाला समय कम होगा।
“नई तकनीक से लैस ये वाहन कानून व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं को और मजबूत करेंगे।”
औद्योगिक जिला कोरबा के लिए बड़ी जरूरत थी : लखनलाल देवांगन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रम, आबकारी एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि कोरबा प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक जिला है। यहां बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां, कोयला खदानें, विद्युत संयंत्र और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र मौजूद हैं। ऐसे जिले में मजबूत और तेज आपातकालीन रिस्पॉन्स सिस्टम की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
उन्होंने कहा कि नई हाईटेक डायल-112 गाड़ियों के जुड़ने से पुलिसिंग और इमरजेंसी सेवा दोनों को मजबूती मिलेगी।
“कोरबा औद्योगिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण जिला है। यहां तेज इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम जरूरी है। नई डायल-112 गाड़ियां कानून व्यवस्था और जनता की सुरक्षा के लिए काफी लाभदायक साबित होंगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार और गृह विभाग लगातार आधुनिक तकनीक के जरिए पुलिस व्यवस्था को और मजबूत बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
“गोल्डन पीरियड” में इलाज पहुंचाना हमारी प्राथमिकता : कलेक्टर कुणाल दुदावत
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि आपातकालीन सेवाओं में सबसे महत्वपूर्ण समय दुर्घटना या घटना के बाद के शुरुआती मिनट होते हैं, जिन्हें “गोल्डन पीरियड” कहा जाता है। यदि इस दौरान पीड़ित को प्राथमिक उपचार मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
उन्होंने बताया कि पिछले महीने ही जिले को 13 नई संजीवनी 108 एक्सप्रेस गाड़ियां भी मिली थीं, जिससे स्वास्थ्य आपातकालीन सेवाओं को मजबूती मिली है। इसके अलावा प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत 8 मोबाइल यूनिट पहले से ही पूरे क्षेत्र में सक्रिय हैं।
“हमारी कोशिश है कि किसी भी पीड़ित तक पहले 20 मिनट के भीतर प्राथमिक उपचार और सहायता पहुंचे। गोल्डन पीरियड में बेसिक ट्रीटमेंट मिलने से सर्वाइवल के चांस काफी बढ़ जाते हैं।”
कलेक्टर ने बताया कि जिला प्रशासन सार्वजनिक उपक्रमों और औद्योगिक संस्थानों को अधिक मोबाइल यूनिट संचालित करने के निर्देश भी दे रहा है ताकि किसी भी इमरजेंसी स्थिति में रेस्पॉन्स और तेज किया जा सके।
उन्होंने डायल-112 में तैनात पुलिसकर्मियों और स्टाफ को प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिलाने की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यदि रिस्पॉन्स टीम बेसिक मेडिकल सहायता देने में प्रशिक्षित होगी तो कई गंभीर परिस्थितियों में लोगों की जान बचाई जा सकती है।
पुलिसिंग को और स्मार्ट बनाने की दिशा में बड़ा कदम : एसपी सिद्धार्थ तिवारी
पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने नई गाड़ियों की तकनीकी खूबियों की जानकारी देते हुए कहा कि यह सिर्फ वाहन नहीं बल्कि मोबाइल रिस्पॉन्स यूनिट हैं।
उन्होंने बताया कि इन गाड़ियों में लगे AI बेस्ड सिस्टम, कैमरा और डिजिटल कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के जरिए घटनास्थल की बेहतर निगरानी और त्वरित कार्रवाई संभव होगी।
“हम लगातार यह प्रयास कर रहे हैं कि लोकल स्तर पर भी इन गाड़ियों में और कौन-कौन से बेहतर फीचर्स जोड़े जा सकते हैं ताकि इमरजेंसी रिस्पॉन्स और प्रभावी हो सके।”
उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा, सड़क हादसों और ग्रामीण क्षेत्रों में त्वरित सहायता के लिए ये गाड़ियां काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
महिला सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष फोकस
नई डायल-112 गाड़ियों को सिर्फ शहरी क्षेत्र ही नहीं बल्कि दूरस्थ ग्रामीण और औद्योगिक इलाकों में भी तैनात किया जाएगा। पुलिस विभाग के अनुसार कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां समय पर मदद पहुंचाने में दूरी और संचार व्यवस्था चुनौती बन जाती थी। नई तकनीक और बेहतर मॉनिटरिंग सिस्टम से इन समस्याओं को कम करने में मदद मिलेगी।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए गाड़ियों में SOS आधारित रिस्पॉन्स सिस्टम और डिजिटल ट्रैकिंग फीचर जोड़े गए हैं। इससे किसी भी संकट की स्थिति में कंट्रोल रूम तुरंत लोकेशन ट्रेस कर सहायता भेज सकेगा।
जनता को मिलेगा सीधा लाभ
नई हाईटेक डायल-112 गाड़ियों के शुरू होने से आम लोगों को सबसे बड़ा लाभ त्वरित सहायता के रूप में मिलेगा। दुर्घटना, अपराध, विवाद, महिला सुरक्षा या किसी भी आपात स्थिति में अब पहले से अधिक तेजी से मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
औद्योगिक जिला होने के कारण कोरबा में लगातार भारी वाहन, खदान क्षेत्र और औद्योगिक गतिविधियां संचालित होती हैं। ऐसे में मजबूत इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम केवल कानून व्यवस्था ही नहीं बल्कि जनसुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी माना जा रहा है।
नई तकनीक, बेहतर मॉनिटरिंग और तेज रिस्पॉन्स क्षमता के साथ
अब कोरबा की डायल-112 सेवा “स्मार्ट पुलिसिंग” की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
