
रायपुर, छत्तीसगढ़।छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के लगभग 16,500 कर्मचारियों ने इस त्योहारी सीजन में भारी निराशा और मायूसी व्यक्त की है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार से उनकी मांगों पर सहमति बनने के बाद भी, उनकी 33 दिन की हड़ताल अवधि का वेतन काट दिया गया है और कई प्रमुख वादों के आदेश अभी तक जारी नहीं किए गए हैं।

प्रमुख शिकायतें: वेतन कटौती और लंबित आदेश
छ.ग. प्रदेश एन.एच.एम. कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने हाल ही में 33 दिनों की लंबी हड़ताल की थी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव के हस्तक्षेप के बाद यह हड़ताल समाप्त हुई थी। संघ के अनुसार, 10 मांगों में से 4 को तुरंत पूरा करने तथा ग्रेड-पे, अनुकम्पा नियुक्ति और स्थानांतरण जैसी मांगों को 3 महीने की समय सीमा में पूरा करने पर सहमति बनी थी।

कर्मचारियों की मुख्य शिकायतें निम्नलिखित हैं:
* 33 दिन की हड़ताल अवधि का वेतन काटा गया: कर्मचारियों का कहना है कि जब उनकी मांगें जायज थीं और आंदोलन को संवैधानिक बताया गया था, तो वेतन कटौती पूरी तरह से अवैध है। उनका आरोप है कि अधिकारियों की दमनकारी नीति के चलते त्योहारी मौसम में उनके साथ यह भेदभाव किया जा रहा है।
* 25 बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली लंबित: स्वयं मुख्यमंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष सहित 25 बर्खास्त कर्मचारियों की जल्द बहाली की बात कही थी, लेकिन 22 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक बहाली का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।
कर्मचारी संघ ने सवाल उठाया है कि विष्णु के ‘सुशासन’ में, जहाँ अन्य सभी कर्मचारी संघों के साथ ऐसा नहीं हुआ, वहीं NHM कर्मचारियों की जेबें इस त्योहारी सीजन में क्यों खाली की जा रही हैं।
सहमति बनी, पर आदेश नहीं आए: लंबित मांगें
संघ ने उन मांगों का विवरण दिया है जिन पर सहमति तो बन गई थी, लेकिन आदेश जारी नहीं हुए:

कर्मचारियों की गुहार
NHM कर्मचारियों का कहना है कि जहां पूरा प्रदेश त्यौहार मना रहा है, वहीं वे मायूस बैठे हैं। वेतन कटौती के कारण उनके पास घर चलाने तक के पैसे नहीं हैं, त्यौहार मनाना तो दूर की बात है।
कर्मचारी संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि:
* 33 दिन की हड़ताल अवधि का वेतन तुरंत जारी किया जाए।
* मांगों से संबंधित लंबित आदेश तत्काल जारी किए जाएं।
* 25 बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली का आदेश तुरंत लाया जाए।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अधिकारियों द्वारा जारी वेतन कटौती के आदेशों को ही माना और त्वरित कार्रवाई नहीं की, तो भविष्य में सरकार और कर्मचारियों के बीच ‘रार’ (टकराव) तय है।
